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गोवंश मरते रहे, प्रशासन सोता रहा! जनआक्रोश के बाद दर्ज हुई FIR, गौशाला में 3 मौतों ने फिर खड़े किए सवाल

IMG 20260830 195304गोवंश की मौतों पर प्रशासन की नींद नहीं टूटी! कहीं रेलवे ट्रैक पर 25 से 30 गौवंश की मौत, तो कहीं गौशाला में तीन की मौत के बाद उठे सवाल

खरगापुर/जरूआ। जिले में गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुड़ीला थाना क्षेत्र के चिनगुवा रेलवे पुल पर अम्बेडकर नगर एक्सप्रेस की चपेट में आकर करीब 25 से 30 गोवंशों की मौत के मामले में कई दिनों तक कार्रवाई नहीं होने के बाद आखिरकार पुलिस ने 8 से 10 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। वहीं जरूआ की राधारानी गौशाला में तीन गौवंशों के मृत पाए जाने के दावे और वायरल वीडियो ने गौशालाओं की व्यवस्थाओं तथा प्रशासनिक निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनआक्रोश के बाद जागी पुलिस!

चिनगुवा रेलवे पुल की घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों, बजरंग दल कार्यकर्ताओं और गोसेवकों ने मामले को प्रमुखता से उठाया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विरोध और लगातार उठती आवाजों के बाद कुड़ीला थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।

ग्रामीणों और गोसेवकों का आरोप है कि कोटरा गांव की ओर से कुछ लोगों द्वारा गोवंशों को रेलवे ट्रैक की ओर हांके जाने के कारण हादसा हुआ। हालांकि पुलिस ने अभी किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

दूसरी ओर गौशाला में तीन मौतों ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल?

जरूआ की राधारानी गौशाला में तीन गौवंशों के मृत पाए जाने के दावे के बाद ग्रामीणों ने चारा, पानी और देखरेख की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी अनुदान से गौशालाएं संचालित हो रही हैं, तो वहां गौवंशों की स्थिति की नियमित निगरानी कौन कर रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं? अगर निरीक्षण हो रहे हैं तो फिर ऐसी घटनाएं सामने क्यों आ रही हैं?

दो घटनाएं, एक बड़ा सवाल—जवाबदेही कब तय होगी?

एक ओर रेलवे ट्रैक पर बड़ी संख्या में गौवंशों की मौत और दूसरी ओर गौशाला में गौवंशों की मौत के दावों ने जिले की गौवंश संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि केवल घटना के बाद एफआईआर दर्ज करना या जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए जिम्मेदार विभागों को पहले से सतर्क रहना होगा।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं। क्या कलेक्टर इन मामलों का संज्ञान लेकर संबंधित क्षेत्रों और गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण कराएंगे? क्या गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान, चारा-पानी और व्यवस्थाओं की जांच होगी? और यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों एवं संचालकों की जवाबदेही तय होगी?

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