
।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, सोमवार 31 अगस्त 2026 ।।
नागपुर/महाराष्ट्र —::

। समस्त गुरुजनों/ शिक्षकों कौ को सादर नमन,वंदन,अभिनंदन ।
===================
भारतदेश में प्राचीन काल से ही गुरू शिष्य की परंपरा का विशेष महत्व रहा है। हमारे भारतदेश में गुरुजनों/ शिक्षकों को हमेशा विशेष स्थान दिया गया है। भारतदेश में में तो शिक्षक/गुरूजनों को ईश्वर और माता-पिता सै भी ऊपर माना जाता है। 05 सितंबर शिक्षक दिवस का दिन हमारे भारतदेश के लिए कोई आम साधारण दिन नहीं रह जाता है, इस दिन देशभर में शिक्षकों ,गुरूजनों को श्रद्धा आस्थापूर्वक पूजा जाता है, सम्मान दिया जाता है। शिक्षक दिवस पर सभी अपने गुरूजनों, शिक्षकों, मार्गदर्शकों याद करतें हैं, उनका अभिनंदन करतें हैं। प्रतिवर्ष 05 सितंबर को शिक्षक दिवस को रूप में मनाया जाता है।.शिक्षक दिवस गुरु-शिष्य की परंपरा को समर्पित दिन है,और यह गूरू शिष्य की परंपरा तो हमारे भारतदेश की संस्कृति का एक बहुत ही अहम हिस्सा भी रहा है। हमारे जीवन में वैसे तो माता पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता है, क्योकि माता पिता ही हमें इस खूबसूरत संसार में लातें हैं, परंतु गूरू का जीवन.में अपना एक अलग ही महत्व होता है। जीवन जीने की असली कला हमें गुरू ही सीखलातें हैं। शिक्षक हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करतें हैं, हमारे जीवन को ऊंचाईयों पर ले जाने का महत्व भी गूरू को ही दिया जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का अध्यापन के पेशे के प्रति आपाार प्रेम समर्पण, लगाव के कारण ही उनका जन्मदिन, पूरे देशभर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक राजनयिक, शिक्षक, और भारत के राष्ट्रपति के रूप में भी प्रसिद्ध रहें हैं। गुरू/शिक्षक का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बहुत ही महत्व रहता है। गुरू का समाज में एक विशिष्ट स्थान होता है। डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक आदर्श शिक्षक रहें हैं। गुरू उस माली के समान होता है, जो कि एक बगीचे को अलग अलग रूप रंगों के फूलों से सजाता है संवारता है, गुरू हमेशा अपने शिष्यों को मुश्किल समय मे मुस्कुरा के चलने के प्रेरित कलता है। आज शिक्षा को हर घर ,हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए सरकारों द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहें हैं।एक शिक्षक ही अपने शिष्यों में अच्छे चरित्र का निर्माण कलतें हैं। 05 सितंबर डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिन है, राधाकृष्णन जी ने अपने जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की बात कही थी,और इसी कारण से 05 सितंबर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। शिक्षक दिवस पर हन केवल राधाकृष्णन जी की बात करें तो यह कहीं न कहीं शिक्षक दिवस के साथ न्याय नहीं होगा, क्योंकि ऐसा करके हम स्वयं इस पावन दिन को संकुचित सीमित कर देंगें,इसलिए शिक्षक दिवस का यह पावन दिन उन सभी गुरूजनों शिक्षकों को समर्पित होना चाहिए, जिनसे की हम सब ने अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा समझा और पाया है। शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर हम उन सभी गुरूजनों शिक्षकों को सादर नमन करतें हैं,वंदन करते हैं, अभिनंदन करतें हैं, जिन्होनें हमारे जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाई है,और जिनके कारण हमारे खाली जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश फैला है। एक व्यक्ति के जीवन में गुरू का बहुत योगदान रहता है,जीवन की शुरुआत में बच्चे की प्रथम गुरू मां होती है, वहीं विद्यालय में अध्यापक, गूरू व्यक्ति के जीवन को संवारनें में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभातें हैं। वैसे तो प्रत्येक दिन शिक्षक पूज्यनीय ,आदरणीय होतें हैं,परंतु 05 सितंबर का यह पावन दिन भारतदेश में में शिक्षक दिवस के रूप में मनातें हुए हम शिक्षक, गुरूजनों का विशेष सम्मान करतें हैं।.हमे सदा ही अपने गूरूजनों का सम्मान करना चाहिए, ऊनकी कही हुई बातों पर अमल भी करना चाहिए।.यदि हम जीवन में सफलता चाहतें हैं, प्राप्त करतें हैं तो इसका श्रेय अपने माता पिता के साथ साथ शिक्षकों को भी जाता है,क्योंकि एक शिक्षक गुरू ही हमें सही मार्गदर्शन देतें हैं, आगे बढ़ने की प्रेरणा देतें हैं। हम सब के लिए यह शिक्षक दिवस बहुत ही यादगार अवसर है, यह उन तमाम शिक्षकों गुरूजनों को याद करने और उन्हें धन्यवाद देने का सुनहरा अवसर है, जिन्होनें कि हमारे जीवन को संवारनें बनानें में अपना महत्वपूर्ण योगदान, अमूल्य समय दिया है। शिक्षक उचित मार्गदर्शक, सलाहकार भी होतें हैं जो कि हमें एक भले इंसान के रूप में विकसित होने में हमारी मदद करतें हैं। शिक्षक राष्ट्र निर्माता भी होतें हैं। शिक्षक दिवस के दिन छात्र, शैक्षणिक संस्थान, और सरकार भी शिक्षकों को नमन करतें हैं,और देश के भविष्य को सही आकार देनें के लिए उनकी मेहनत लगन ,समर्पण को स्वीकार करतें हैं । शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर हम सब समस्त गुरूजनें ,शिक्षकों का सच्ची निष्ठा, श्रद्धापूर्वक नमन करतें हैं,वंदन करतें हैं, और यह कामना भी करतें हैं कि शिक्षकों,गुरूजनों के सम्मान हेतु समर्पित यह शिक्षक दिवस केवल एक पर्व ही बनकर न रह जाए,बल्कि यह शिक्षक दिवस शिक्षकों के आत्म सम्मान, आत्मचिंतन, आत्ममंथन का भी दिवस हो। शिक्षकों, गूरूजनों की छत्र छाया में रहकर हमारा भारत देश का र्स्वणिम भविष्य निखर कर पूरी दुनीयां में जगमंगाए।.डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी जैसे महान शिक्षकों के समर्पण से यह भारतदेश शिक्षा के साथ साथ हर क्षेत्र में जगद्गुरू बनकर पूूरे विश्व का कल्याण करे। ” गुरू ही ब्रम्हा है,गूरू ही विष्णु है,गुरूदेव ही महेश्वर हैं ।,गूरू ही मूल ब्रम्हा का साकार रूप हैं,”। समस्त गुरूजनों,शिक्षक बंधुओं को सादर प्रणाम, नमन। । शिक्षक दिवस पर हार्दिक हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं ।। जय गुरूदेव, जय श्रीराम ।। वंदेमातरम ।।



