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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का बड़ा ऐलान – निजीकरण के खिलाफ 04 अगस्त को होगा प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन, आंदोलन के पूरे हुए 250 दिन

समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण का यह निर्णय “लूट का दस्तावेज” है, जो गलत आंकड़ों और अपारदर्शी प्रक्रियाओं पर आधारित है

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🚨 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का बड़ा ऐलान – निजीकरण के खिलाफ 04 अगस्त को होगा प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन, आंदोलन के पूरे हुए 250 दिन

लखनऊ – विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को पत्र भेजकर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण का यह निर्णय “लूट का दस्तावेज” है, जो गलत आंकड़ों और अपारदर्शी प्रक्रियाओं पर आधारित है। समिति का कहना है कि निजीकरण की प्रक्रिया के पीछे करोड़ों का घोटाला छिपा है, जो राज्य की संपत्तियों को कौड़ियों के दाम निजी घरानों को सौंपने की साजिश है।

संघर्ष समिति ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है और अगर निजीकरण का निर्णय वापस ले लिया जाए तो बिजली कर्मी दोगुने उत्साह से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देंगे। समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर भरोसा है और उम्मीद है कि मुख्य सचिव तत्काल हस्तक्षेप कर इस “लूट” को रोकेंगे।

पत्र में समिति ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा घाटे के जो आंकड़े दिए गए हैं, वे भ्रामक हैं। इसमें सरकारी सब्सिडी और विभागों के बकाये को भी घाटे में जोड़ दिया गया है, जबकि सही मूल्यांकन करने पर कई निगम घाटे में नहीं हैं। इसके अलावा, निजीकरण की प्रक्रिया में मेसर्स ग्रांट थॉर्टन को ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किया गया, जबकि इस कंपनी पर अमेरिका में जुर्माना लग चुका है और उसने झूठा शपथ पत्र दिया था। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों और इस कंपनी के बीच मिलीभगत रही है।

समिति के अनुसार, लगभग एक लाख करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की परिसंपत्तियों को बेचने के लिए रिजर्व प्राइस मात्र 6,500 करोड़ रुपए तय की गई है और सारी जमीन निजी कंपनियों को एक रुपए की लीज पर देने की योजना है। न तो किसी सरकारी एजेंसी से परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया गया और न ही राजस्व क्षमता का आकलन हुआ।

इन तमाम तथ्यों के आधार पर समिति ने कहा कि निजीकरण का निर्णय रद्द किया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में 04 अगस्त को आंदोलन के 250 दिन पूरे होने पर प्रदेशभर के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। राजधानी लखनऊ में अपराह्न 1 बजे से मध्यांचल मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन होगा।

रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश महासचिव – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
📞 8217554083

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