

अग्रकुल शिरोमणि महाराजा अग्रसेन की जयंती पर होने वाले समारोह से वैश्य समाज के विशिष्ट लोग नदारद, समन्वय समिति की धनलोलुप ओर एकल चलो की प्रवर्ति के चलते समाज मे एकत्रीकरण की जगह बिखराव का संदेश दे रहे अध्यक्ष और महामन्त्री।
वही नगर विधायक राजीव गुम्बर के अथक प्रयास के कारण गाज़ियाबाद भाजपा सांसद अतुल गर्ग का कार्यक्रम दो दिन पूर्व मिलने के पश्चात भी होर्डिंग बेनर से उनका नाम नदारद होना चर्चा का विषय बना।
समन्वय समिति एक नेता की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह संचालित, आखिर क्या उपलब्धियां है वैश्य समाज के लिए इस कम्पनी की।
सहारनपुर: अग्रकुल शिरोमणि महाराजा अग्रसेन की जयंती को लेकर समन्वय समिति यू तो सदैव नकारात्मक प्रदर्शन करती रही है केवल राजनीति चमकाने ओर दूसरे नेताओं का पिछलग्गू बन कर अपनी कमीज साफ दिखाने में मशहूर समन्वय समिति के उदासीन अध्यक्ष ओर सभी राजनेताओं की चापलूसी करते देखे जाने वाले महामन्त्री की कार्यशैली ने समाज को शर्मसार ही किया प्रतीत हो रहा है, महामन्त्री का कार्य मात्र जनपद में आने वाले मंत्रियों और नेताओं के साथ फोटो सेशन कराने तक ही सीमित दिखाई देता है, एक डोली मछली नेता की चाकरी करते करते समन्वय समिति का स्वरूप क्या कर डाला गया यह समाज के समक्ष है, समाज को बेचने वाले लोग बैनर पर सबसे ऊपर, ओर कर्मठ वैश्य समाज के लोग गायब, यही नही वरिष्ठ समाज के लोगो के प्रति बरती गई उदासीनता ओर केवल चंद लोगो को ही आमंत्रित करने का कुचक्र समन्वय समिति के अध्यक्ष, महामन्त्री के साथ ऐसे लोग जो बस सोशल मीडिया या फिर हॉर्डिंग वीर है, यह लोग कितने समाज के प्रति जागरूक है कहना बड़ा मुश्किल है, इस बार की जयंती में सूत्र बताते है कि मात्र चंदा एकत्रित करने का कार्य हुआ, परन्तु कितना एकत्र हुआ, कितना खर्च हुआ, कितना खर्च होगा न तो समिति बताना चाहती है और न ही बताया गया, महामन्त्री कितनी बेशर्मी के साथ एकल चलो की पद्धति पर चलकर कभी मंत्री नंद गोपाल नंदी के साथ फोटो और कभी बिन बुलाए एक समाज के प्रतिष्टित व्यक्ति के निवास पर पहुंच कर आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के साथ फोटो खिंचवा कर अपनी सोशल मीडिया डीपी पर लगाने वाले वीर की अब समाज के प्रति उनकी आस्थाओं की हवा निकलती भी प्रतीत हुई है, समाज के लिए कितने लोगों को इन समाज के ठेकेदारों के द्वारा लाभांवित किया गया, कितने असहाय ओर मजबूर लोगो के साथ यह खड़े रहे, यह बताने का प्रयास कभी नही किया, जेबी संस्था बनाकर छोड़ दिया गया, सही मायने में एक नेता की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना कर छोड़ दिया गया, सही मायने में समाज के वह भामाशाह कहां है जिन पर समाज को गर्व है। केवल ऐसे नेता जो समाज को केवल दिन रात हर पार्टी का चक्कर लगाकर सिर्फ यह दिखाकर की में वैश्य समाज का कर्ता धर्ता हूं बस अपनी पार्टी में स्थान लेने का प्रयास करना है यदि कुछ मिल गया तो ठीक वरना अगली पार्टी में दो साल निकाल देंगे, बहरहाल समन्वय समिति के नाम पर अध्यक्ष महामन्त्री अपनी राजनीति कर समाज को गर्त में धकेलने का कार्य न करे, अन्यथा यह वैश्य समाज का गौरवशाली इतिहास भी रहा है कि यदि इस प्रकार समाज के प्रति उदासीन रवैया अपनाओगे तो फिर ढूंढते ही रह जाओगे, इस बार समाज देख रहा है लेकिन शायद इसके बाद समाज सारे कार्यो ओर धन का लेखाजोखा ओर खर्च का हिसाब मांगने के लिए भी इसी प्रकार आंदोलन चलाएगा, यह वैश्य समाज है देना जनता है, तो हिसाब मांगना भी जानता है, ओर यदि आप समझते हो कि कार्यक्रम के बाद त्याग पत्र देकर छोड़ दोगे यह भी समाज को स्वीकार्य नही होगा। आज जयंती है समन्वय समिति की उदासीनता के चलते समाज के गौरवशाली व्यक्ति दूर है अथवा अपनी राजनीति के चलते उन्हें आमंत्रित ही नही किया गया बस एक सूत्रीय कार्यक्रम अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपनो को दे, कि कहावत चरितार्थ होती प्रतीत हो रही है।





