

वास्काडुवा (श्रीलंका)। भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाते हुए श्रीलंका के वास्काडुवा शहर स्थित श्री सुभूति विहाराय में सम्राट अशोक के प्रसिद्ध स्तंभ की प्रतिकृति का अनावरण किया गया। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम 21 जुलाई 2025 को संपन्न हुआ।
कोलंबो से लगभग 42 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस बौद्ध मंदिर में आयोजित इस समारोह में श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध धर्मगुरु परम पूज्य वास्काडुवे महिंदवांसा महानायक थेरो, भारत के उच्चायुक्त श्री संतोष झा (मुख्य अतिथि), वास्काडुवा प्रादेशीय सभा अध्यक्ष श्री अरुणा प्रसाद चंद्रशेखर, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के उप महासचिव डॉ. दामेंडा पोराज, धम्म सचिव डॉ. शर्मिला मिलरॉय और कई अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
महामहिम लिंग रिनपोछे का विशेष योगदान
इस स्तंभ की प्रतिकृति का निर्माण महामहिम क्याब्जे लिंग रिनपोछे के संरक्षण में हुआ, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख गुरु हैं और 14वें दलाई लामा के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं। ज्ञात हो कि 6वें लिंग रिनपोछे 97वें गदेन त्रिपा और दलाई लामा के वरिष्ठ गुरु रहे, जबकि वर्तमान 7वें अवतार का जन्म 1985 में हुआ और वे कर्नाटक स्थित द्रेपुंग लोसेलिंग मठ के प्रमुख पद पर हैं।
अशोक स्तंभ की आधारशिला और उद्देश्य
इस प्रतिकृति की आधारशिला 28 जनवरी 2024 को भारत के उच्चायुक्त श्री संतोष झा और IBC महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे द्वारा रखी गई थी। इस स्तंभ का उद्देश्य श्रीलंका में सम्राट अशोक की बौद्ध धर्म प्रचार में भूमिका का सम्मान करना है।
सम्राट अशोक का श्रीलंका से ऐतिहासिक जुड़ाव
महानायक थेरो ने कहा, “सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महिंद थेरो और पुत्री संघमित्रा थेरी को श्रीलंका भेजकर यहां बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। उनकी इस अविस्मरणीय सेवा को याद करने हेतु यह स्तंभ स्थापित किया गया है।”
भारत की ओर से बौद्ध सहयोग
उच्चायुक्त श्री संतोष झा ने कहा कि भारत सरकार ने 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता से श्रीलंका के लगभग 10,000 बौद्ध मंदिरों में निःशुल्क सौर ऊर्जा परियोजना शुरू की है। साथ ही पाली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और बौद्ध ग्रंथों के पुनः प्रकाशन की भी पहल की जा रही है।
बुद्ध अवशेष और अंतरराष्ट्रीय संबंध
उच्चायुक्त झा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा के दौरान श्रीलंका के अनुराधापुर शहर में पवित्र बौद्ध स्थलों के विकास हेतु सहायता की घोषणा की गई। इसके अलावा भारत से देवनिमोरी (गुजरात) से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को श्रीलंका लाकर प्रदर्शन की योजना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने हांगकांग में बुद्ध के पवित्र रत्न अवशेषों की अवैध नीलामी को रुकवाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
वास्काडुवा मंदिर की विशेषता
IBC उप महासचिव डॉ. दामेंडा पोराज ने बताया कि वास्काडुवा मंदिर में भगवान बुद्ध के पवित्र और प्रमाणिक अवशेष सुरक्षित हैं, जो भारत सरकार द्वारा श्रीलंका को उपहार स्वरूप दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत-श्रीलंका संबंधों का प्रतीक बन गया है।

निष्कर्ष:
अशोक स्तंभ की यह प्रतिकृति न केवल बौद्ध धरोहर का सम्मान है, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
रिपोर्ट: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज, ब्यूरो










