
समीर वानखेड़े :
विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर स्वायत्त संस्थाओं में दखलंदाज़ी का आरोप लगा रहा है। अब, भाजपा की पूर्व प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील आरती साठे को बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने ट्वीट कर इस पर कई सवाल उठाए थे। इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी आरती साठे की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। अब, राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
राज्य की राजनीति में दो साल पहले भाजपा की प्रवक्ता रहीं आरती साठे को मुंबई उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 जुलाई को मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय में 3 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है। इसमें भाजपा की प्रवक्ता रहीं आरती साठे का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायक रोहित पवार ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता के रूप में वकालत करने वाले व्यक्ति को न्यायाधीश नियुक्त करना गलत होगा और इसका न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। अब, अजित पवार ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
इस संदर्भ में, न्यायपालिका न्यायपालिका का काम कर रही है। केंद्र या राज्य सरकार क्या निर्णय ले, इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। इस संबंध में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दी जा रही हैं। हालाँकि, यह न्यायालय का पूरा अधिकार है, ऐसा उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा।
इससे पहले भी कई लोगों ने जस्टिस रोहित पवार स्वाति साठे की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। लेकिन रोहित पवार उन्हें रोक नहीं पाएंगे। क्या शरद पवार रोहित पवार की बात सुनेंगे या नहीं? महाराष्ट्र इसका इंतजार कर रहा है। एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते ने बताया इससे पहले भी जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर एक राजनीतिक दल से जुड़े थे वह सुप्रीम कोर्ट में जज थे और केरल की कम्युनिस्ट सरकार में मंत्री थे। जस्टिस पी.बी. सावंत डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े थे। जस्टिस रमन्ना ने आपातकाल के दौरान आंदोलन में भाग लिया था, । साथ ही, एक लोक सेवक को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं करते हैं। वह केवल बातें करते हैं, वह मीडिया के सामने बोलते हैं। सदावर्ते ने भी चेतावनी दी है रोहित पवार को ध्यान देना चाहिए कि उन्हें कानून के दायरे में रहने की जरूरत है ।






