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*मुख्यमंत्री के दौरे से पहले बड़वारा में हेलीपैड को लेकर हंगामा: हाई टेंशन लाइन और बच्चों के विरोध ने रोका निर्माण, कांग्रेस ने भी उठाए सवाल**

**मुख्यमंत्री के दौरे से पहले बड़वारा में हेलीपैड को लेकर हंगामा: हाई टेंशन लाइन और बच्चों के विरोध ने रोका निर्माण, कांग्रेस ने भी उठाए सवाल**

**बड़वारा (कटनी)।** मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रस्तावित बड़वारा दौरे से पहले प्रशासनिक तैयारियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय मैदान में बनाए जा रहे हेलीपैड का बच्चों और स्थानीय नागरिकों ने विरोध करते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। विरोध के पीछे जहां एक ओर हाई टेंशन विद्युत लाइन को सुरक्षा के लिहाज से खतरा बताया गया, वहीं दूसरी ओर बच्चों ने ग्राउंड की बार-बार खुदाई पर नाराज़गी जताई।

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बच्चों का कहना है कि हर बार सीएम या किसी वीआईपी के दौरे पर मैदान को खोदकर हेलीपैड बना दिया जाता है, लेकिन उसके बाद उसकी मरम्मत नहीं होती। उन्होंने बताया कि मैदान को लेवल करने के लिए वे खुद चंदा इकट्ठा करते हैं और खेल अभ्यास करते हैं। ऐसे में बार-बार मैदान का उखाड़ा जाना उनके भविष्य से खिलवाड़ है। बच्चों ने विरोध करते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया।

घटना के वक्त मौके पर पीडब्ल्यूडी के एसडीओ विवेक श्रीवास्तव भी मौजूद थे, लेकिन बच्चों और स्थानीय लोगों के विरोध के आगे निर्माण कार्य रोकना पड़ा।

**हाई टेंशन तार से सुरक्षा खतरे की आशंका**

जिस ग्राउंड में हेलीपैड बनाया जा रहा है, उसके ठीक ऊपर से हाई टेंशन विद्युत लाइन गुज़रती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से यह जगह उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इसी स्थान पर हेलीपैड निर्माण पर अड़े रहने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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**कांग्रेस ने उठाया मोर्चा, कहा— बच्चों के भविष्य से खिलवाड़**

विवाद बढ़ता देख कांग्रेस भी मैदान में उतर आई। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विकास निगम ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “यह मैदान स्टेट लेवल के खेलों का केंद्र रहा है। बच्चों के चंदे और मेहनत से तैयार किए गए मैदान को हर बार प्रशासन वीआईपी हेलीपैड के लिए खुदवा देता है, लेकिन बाद में कोई मरम्मत नहीं कराता। यह बच्चों के भविष्य और खेल संस्कृति से खिलवाड़ है।”

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करेगी और ज़रूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाएगी।

**प्रशासन की चुप्पी, सवालों के घेरे में तैयारियां**

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और स्थानीय विरोध को दरकिनार कर हेलीपैड निर्माण को लेकर अब प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

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