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एसएसपी आशीष तिवारी के नेतृत्व में ‘मिशन शक्ति’ का जज़्बा — इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह की टीम ने दिखाई बहादुरी और संवेदना, बचाई महिला की ज़िंदगी

थाना कोतवाली नगर को सूचना मिली कि एक महिला ने किसी निजी विवाद और मानसिक तनाव के कारण अपने कमरे में बंद होकर आग लगा ली

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एसएसपी आशीष तिवारी के नेतृत्व में ‘मिशन शक्ति’ का जज़्बा — इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह की टीम ने दिखाई बहादुरी और संवेदना, बचाई महिला की ज़िंदगी

सहारनपुर: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी के नेतृत्व में चल रहे मिशन शक्ति फेज-5.0 ने सुरक्षा के दायरे को केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे संवेदनशीलता, साहस और मानवता के प्रतीक के रूप में भी स्थापित किया है। शुक्रवार की दोपहर, थाना कोतवाली नगर को सूचना मिली कि एक महिला ने किसी निजी विवाद और मानसिक तनाव के कारण अपने कमरे में बंद होकर आग लगा ली है और उसकी जान खतरे में है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह ने बिना किसी विलंब के अपनी एंटी रोमियो टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँचना सुनिश्चित किया। मौके पर पहुँचकर उन्होंने देखा कि कमरा धुएँ और आग से घिरा हुआ था, और महिला सिमरन कर्णवाल की स्थिति गंभीर थी। इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह और उनकी टीम ने किसी क्षण की हिचकिचाहट नहीं दिखाई, बल्कि अपने कर्तव्य और मानवता के निष्ठापूर्ण भाव के साथ तत्काल कार्रवाई करते हुए दरवाज़ा तोड़ा और महिला को गंभीर जोखिम में रहते हुए सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद टीम ने तुरंत आग पर काबू पाया और सिमरन को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार और मानसिक सहारा प्रदान किया। इस प्रक्रिया में मिशन शक्ति टीम ने केवल महिला की शारीरिक सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं की, बल्कि उसकी भावनाओं, मानसिक स्थिति और परिवारिक परिस्थितियों की भी गहनता से परवाह की। उन्होंने सिमरन के ससुराल और मायके दोनों पक्षों से संवाद स्थापित किया, उसकी समस्याओं और तनाव की जड़ तक पहुँचकर उसे समझाया और शांत किया, ताकि वह किसी भी प्रकार की आपराधिक या कानूनी कार्रवाई के बिना सुरक्षित और मानसिक रूप से सशक्त महसूस कर सके। काउंसलिंग और संवेदनशील बातचीत के बाद सिमरन ने अपनी मां सुमन और मौसी मीना के साथ रहने का निर्णय लिया और उसने ससुराल पक्ष के विरुद्ध किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का चयन किया। इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सहारनपुर पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह अब मानवता, संवेदनाओं और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा करने वाली संस्था बन चुकी है। एसएसपी आशीष तिवारी की सक्रिय और संवेदनशील नेतृत्व शैली ने साबित कर दिया कि जब पुलिसिंग में केवल शक्ति और कर्तव्य ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति भी शामिल होती है, तो परिणाम स्वरूप न केवल अपराध पर काबू पाया जाता है, बल्कि समाज के कमजोर और संकटग्रस्त लोगों की ज़िंदगियाँ भी बचाई जा सकती हैं। इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह और उनकी टीम का यह साहसिक कार्य आधुनिक पुलिसिंग के लिए आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसमें कानून की शक्ति और संवेदना की शक्ति दोनों एक साथ काम करती हैं और समाज में विश्वास का माहौल बनाती हैं। यह घटना स्थानीय समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि पुलिस अब सिर्फ़ अपराधियों को रोकने के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन, सुरक्षा और भावनाओं की रक्षा के लिए भी पूरी तरह समर्पित है। मिशन शक्ति टीम ने यह दिखा दिया है कि संकट और आपात स्थिति में पुलिस केवल बाहरी सुरक्षा नहीं देती, बल्कि मानवता और सहानुभूति के साथ संकट में फंसे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता का भी ध्यान रखती है। सिमरन कर्णवाल की इस कठिन परिस्थिति में बचाव और मदद ने स्थानीय लोगों के बीच पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान को और अधिक बढ़ाया है। यह घटना यह भी स्पष्ट करती है कि जब पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य के साथ संवेदनशील और निष्ठावान रहते हैं, तो वे समाज में केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं बल्कि एक मानवतावादी और भरोसेमंद संरक्षक के रूप में उभरते हैं। एसएसपी आशीष तिवारी की नीतियाँ और मिशन शक्ति का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि अगर पुलिसिंग में आधुनिक तकनीक, तत्परता, टीमवर्क और संवेदनशीलता को मिलाकर काम किया जाए, तो न केवल अपराध रुकते हैं बल्कि समाज में भरोसा और सुरक्षा की भावना भी मजबूत होती है। इस पूरी कार्रवाई में इंस्पेक्टर नेमचंद सिंह और उनकी टीम ने जिस तरह से जोखिम उठाया और संवेदनशीलता दिखाई, वह केवल साहस का उदाहरण नहीं है बल्कि नई और परिणाममुखी पुलिसिंग का मॉडल भी है। उनकी यह बहादुरी और संवेदनशीलता यह दर्शाती है कि पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि समाज में उम्मीद जगाना, संकट में फंसे लोगों को बचाना और उन्हें भावनात्मक सहारा देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस घटना ने पूरे जिले में यह संदेश भेजा है कि सहारनपुर पुलिस अब सिर्फ़ कानून की पालक नहीं, बल्कि समाज की संरक्षक और मानवता की आवाज़ भी बन चुकी है।


✍️ रिपोर्टर: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ / समृद्ध भारत समाचार पत्र
प्रदेश महासचिव – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद, उत्तर प्रदेश
📞 संपर्क: 8217554083

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