आज नहाय-खाय से होगी छठ महापर्व की शुरुआत, सूर्य उपासना से आलोकित होगा आस्था का पर्व✨
सूर्योपासना का लोक महापर्व डाला छठ कल से, घाटों पर सजेगा आस्था का समंदर
दुद्धी/सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_लोक आस्था का महापर्व डाला छठ शनिवार आज से नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। इस दिन से चार दिवसीय सूर्य उपासना की शुरुआत होगी, जो संपूर्ण सृष्टि के ऊर्जा स्रोत भगवान सूर्य की आराधना के रूप में मनाया जाता है। आस्था, शुद्धता और संकल्प का यह पर्व हर ओर श्रद्धा का आलोक बिखेरता है।
शनिवार को व्रती महिलाएं पूर्ण पवित्रता के साथ नहाय-खाय करेंगी। इस दिन लौकी, चावल, चने की दाल, सेंधा नमक, घी और रोटी के साथ सात्विक भोजन ग्रहण कर अगले दिन खरना की तैयारी करेंगी। रविवार को खरना के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जल व्रत शुरू होगा।
तीसरे दिन सोमवार की शाम व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी, वहीं चौथे दिन मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महाव्रत का समापन होगा। घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा, हर ओर ‘छठी मइया’ के गीतों की गूंज सुनाई देगी।
व्रती परिवारों में उत्साह का माहौल है। घरों की विधिवत सफाई के बाद छठ पूजा के लिए ठेकुआ, खाजा, मीठी पूरी, पकौड़ी आदि प्रसाद बनाए जा रहे हैं। सायंकाल व्रती महिलाएं बिना लहसुन-प्याज का सात्विक भोजन करेंगी और भूमि पर शयन करेंगी। माना जाता है कि इस पवित्र भोजन से शरीर को आगामी निर्जल उपवास के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है।
ऐसे मनेगा चार दिवसीय महापर्व —
25 अक्टूबर (शनिवार) – नहाय-खाय
26 अक्टूबर (रविवार) – खरना
27 अक्टूबर (सोमवार) – डूबते सूर्य को अर्घ्य
28 अक्टूबर (मंगलवार) – उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत पारण
नदियों और सरोवरों के घाटों पर व्रती परिवार अपनी-अपनी जगह चिह्नित करने लगे हैं। समितियों द्वारा घाटों की साफ-सफाई, बांस-बल्लियों की सजावट और झालरों से रोशनी करने का कार्य तेज़ी से चल रहा है। प्रशासनिक अमला भी सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था में जुट गया है।


