
सुरेन्द्र दुबे डिस्टिक हेड धार (सीधी) मध्य प्रदेश सरकार स्वास्थ्य मंत्री आखिर डॉक्टर खरे के ऊपर क्यों है मेहरबान जानता है परेशान उसके बावजूद भी स्वास्थ्य मंत्री, सीधी सांसद, सीधी विधायक का किसी प्रकार का एक्शन देखने को नहीं मिल रहा पता नहीं चल रहा की डॉक्टर खरे स्वास्थ्य मंत्री, सीधी सांसद, सीधी विधायक को चला रहा है यह स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल को स्वास्थ्य व्यवस्था को l जय शंभू नारायण।सीधी जिला अस्पताल में सिविल सर्जन की दादागिरी — “अपनी खुद की सरकार” चलाने की कोशिश, कालिख कांड का दर्द अभी ताज़ा, अब पत्रकारों पर निकाल रहे भड़ास
सीधी।
जिले का सरकारी अस्पताल, जहां मरीजों को उपचार मिलना चाहिए, वहां सिविल सर्जन डॉ. एसबी खरे अपनी ही सरकार चलाने में लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि डॉ. खरे अस्पताल को पब्लिक प्लेस नहीं, बल्कि अपनी निजी जागीर मानकर काम कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि कालिख कांड की टीस अब भी डॉ. खरे के मन में गहरी है। इसी कारण वे हर व्यक्ति—मरीज, परिजन, पत्रकार—पर शक की नजर डाल रहे हैं। अस्पताल की इलाज व्यवस्था सुधारने के बजाय वे हर उस आवाज पर नाराज हैं जो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सामने लाना चाहती है।
“हमें बंधक इसलिए बनाया क्योंकि उनके गाल पर कालिख लगी थी” — पत्रकारों का आरोप
पत्रकारों ने बताया कि डॉ. खरे ने स्पष्ट रूप से कहा—
“मेरे चेहरे पर कालिख तुम लोगों की वजह से पोती गई… तुम मीडिया वालों की ही मदद ली गई थी!”
यानी, कालिख कांड को लेकर उनका गुस्सा अब हर पत्रकार, हर आलोचक पर फूट रहा है।
इलाज व्यवस्था छोड़कर, गुस्सा निकालने में लगे सिविल सर्जन
जब जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बदहाल है—
✔ दवाइयों की कमी
✔ स्टाफ अनुपस्थिति
✔ मरीजों की लापरवाही से मौतें
✔ घंटों लाइन में फंसे परिजन
—ऐसे समय में सिविल सर्जन का ध्यान मरीजों पर होना चाहिए था।
लेकिन यहां तो वह इलाज व्यवस्था छोड़कर आरोप लगाने, गेट बंद कर पत्रकारों को कैद करने और विरोध करने वालों पर रौब झाड़ने में उलझे दिखाई देते हैं।
“अपनी मनमर्जी… अपना सिस्टम… अपनी सरकार!”
अस्पताल में मौजूद लोगों का कहना है कि—
डॉ. खरे किसी अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि थानेदार की तरह व्यवहार कर रहे थे।
पत्रकारों को अंदर बंद कर देना इस बात का प्रमाण है कि वे अस्पताल को सरकारी न मानकर अपने निजी राजमहल की तरह चला रहे हैं।
अस्पताल में जनता की आवाज उठाना, अव्यवस्थाओं पर सवाल करना—अब अपराध माना जाने लगा है।
कालिख का दर्द, और बदले की मानसिकता?
यह साफ दिख रहा है कि कालिख कांड ने सिविल सर्जन को अंदर तक हिला दिया है।
लेकिन सवाल यह है—
✔ क्या किसी अधिकारी को व्यक्तिगत खुंदक में चौथे स्तंभ को बंधक बनाने का अधिकार है?
✔ क्या पत्रकारों से बदला लेने के लिए अस्पताल को युद्धभूमि बनाया जा सकता है?
✔ क्या किसी भी सरकारी अधिकारी को “नाराजगी” के नाम पर पब्लिक प्लेस को बंद कर देना चाहिए?
जिले में उबाल — “अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो मरीजों की स्थिति कौन देखेगा?”
इस घटना ने जिले को फिर से हिलाकर रख दिया है।
सामाजिक संगठनों का कहना है—
“जो अधिकारी पत्रकारों को कैद कर सकता है, वह मरीजों पर क्या अत्याचार करता होगा — यह सोचकर ही डर लगता है।”
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि वे शीघ्र ही सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध करेंगे। जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मामले की जांच कर दोषियों के ऊपर कठोर आत्मक कार्रवाई करने का पहला करें अन्यथा जनता कानून को हाथ में लगी और डॉक्टर के ऊपर कठोर आत्मक कार्रवाई करेगी इसके जिम्मेदार जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन होगा






