

“प्रधान जी कहते हैं—गांव में भ्रष्टाचार नहीं है… शायद इसलिए कि सब अपने-अपने हिस्से के हिसाब से शांत हैं!”
🔥 व्यंग्यात्मक लाइनें
1️⃣ “गांव की सड़कें देखकर लगता है प्रधान जी ने विकास नहीं, बस वादा-पत्र ही पक्का किया है।”
2️⃣ “प्रधान जी की मीटिंग में सिर्फ दो चीजें मिलती हैं—चाय और भरोसा… काम तो अगले कार्यकाल में मिलेगा!”
3️⃣ “गांव में बिजली कम और प्रधान जी की बातें ज़्यादा चमकती हैं।”
4️⃣ “प्रधान जी का काम करने का तरीका भी अनोखा है—सब कुछ ‘जल्द’ होगा, बस ‘कब’ कोई नहीं जानता।”
5️⃣ “गांव वाले पानी को तरस रहे हैं, और प्रधान जी सपनों में चुनावी नदियाँ बहा रहे हैं।”
6️⃣ “प्रधान जी के हिसाब से गांव में सब कुछ ठीक है—क्योंकि रिपोर्ट खुद ही बनाते हैं!”
7️⃣ “प्रधान जी का विकास भी मोबाइल नेटवर्क जैसा है—कभी आता है, कभी जाता है, ज्यादातर गायब रहता है।”
8️⃣ “प्रधान जी कहते हैं—गांव में भ्रष्टाचार नहीं है… शायद इसलिए कि सब अपने-अपने हिस्से के हिसाब से शांत हैं!”
कृपया अपने ऊपर व्यक्तिगत ना लें


