
इस नश्वर संसार में केवल भगवान राम का नाम और गुरु की कृपा ही सारस्वत सत्य है श्री महंत रघुवीर दास महाराज हरिद्वार
श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में भक्तजनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए प्रातः स्मरणीय गुरुदेव श्री महंत रघुवीर दास महारा ने कहाजमनुष्य का जीवन अनंत संभावनाओं का केंद्र है, परंतु संसार की आपाधापी और भौतिकता के मोह में अक्सर हमारा मन और मस्तिष्क एक गहरे सूनेपन का शिकार हो जाते हैं। यह सूनापन किसी वस्तु की कमी नहीं, बल्कि आत्मिक बोध का अभाव है। जब तक जीवन में गुरु कृपा और राम नाम की गूँज नहीं होती, तब तक मनुष्य का अस्तित्व उस सूखे मरुस्थल के समान रहता है जहाँ प्यास तो बहुत है, पर तृप्ति का कोई साधन नहीं। राम भजन केवल कंठ से निकलने वाली ध्वनि नहीं, अपितु वह दिव्य औषधि है जो हृदय के घावों को भरती है और अशांत मन को स्थिरता प्रदान करती है। राम की अनुभूति का अर्थ है उस परम चेतना से जुड़ जाना जो सृष्टि के कण-कण में रची-बसी है। जब भक्त के हृदय में राम नाम का दीपक जलता है, तो मोह-माया का अंधकार स्वतः ही छंटने लगता है और उसे जीवन की वास्तविक सार्थकता का बोध होता है। यह सार्थकता धन या पद में नहीं, बल्कि उस आंतरिक संतोष में है जो केवल ईश्वर के चरणों में समर्पित होकर ही प्राप्त किया जा सकता है।परंतु, इस भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए और मन के सूनेपन को दूर करने के लिए ‘गुरु’ का होना अनिवार्य है। गुरु वह मार्गदर्शक है जो हमारे भीतर सोई हुई चेतना को झकझोर कर जगाता है। हमारे मन और मस्तिष्क, जो अज्ञानता के कारण धूल धूसरित हो चुके हैं, उन्हें गुरु अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित कर देते हैं। जैसे सूर्य के उदय होते ही रात्रि का अंधकार विलीन हो जाता है, वैसे ही गुरु के वचनों से हमारे भीतर विवेक का उदय होता है। श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा गुरु हमें सिखाते हैं कि राम को कहीं बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है; वे तो हमारे प्रेम और पवित्रता में ही वास करते हैं। गुरु की वाणी वह बीज है जो शिष्य के हृदय की भूमि पर गिरकर भक्ति का विशाल वटवृक्ष बनाती है। उनके बिना ज्ञान की बातें केवल बौद्धिक विलास बनकर रह जाती हैं, लेकिन उनकी कृपा से वही ज्ञान एक जीवंत अनुभव बन जाता है।जब गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान और राम नाम की अनवरत भक्ति एक साथ मिलते हैं, तो मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। तब मस्तिष्क में केवल विचारों का कोलाहल नहीं होता, बल्कि एक दिव्य शांति का वास होता है। श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा राम की अनुभूति मनुष्य को करुणा, क्षमा और परोपकार की ओर ले जाती है, जिससे वह केवल अपने लिए नहीं बल्कि समस्त जगत के कल्याण के लिए जीने लगता है। यही वह क्षण है जब मनुष्य का सूना पड़ा मन और मस्तिष्क ज्ञान के प्रकाश से जगमगा उठता है और वह समझ पाता है कि इस नश्वर संसार में केवल राम का नाम और गुरु की कृपा ही शाश्वत सत्य है। इस प्रकाश के आलोक में जीवन का हर दुख छोटा लगने लगता है और मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है, क्योंकि तब जीव स्वयं को उस अनंत परमात्मा का ही एक अंश मानने लगता है। वास्तव में, राम की भक्ति और गुरु का सानिध्य ही वह दिव्य सेतु है जिस पर चलकर मानव अपनी तुच्छता को त्याग कर महानता और पूर्णता को प्राप्त करता है।











