दुबई से लौटे युवक को बनाया निशाना: लिफ्ट देने के बहाने बदमाशों ने बेहोश कर लूटे 52 हजार रुपये
बस्ती: बुलेट सवार बदमाशों का दुस्साहस, बेहोश कर लूटा दुबई से लौटे युवक का मोबाइल और नकदी खाकी की बेरुखी: लूट का शिकार हुआ दुबई से लौटा युवक, पुलिस ने सीमा विवाद में घंटों उलझाया
अजीत मिश्रा (खोजी(
खाकी की संवेदनहीनता: दुबई से लौटे युवक को लूटा, पुलिस सीमा विवाद में उलझाती रही!
- विक्रमजोत: स्प्रे से बेहोश कर मोबाइल से उड़ाए 52 हजार, कपड़े तक उतार ले गए लुटेरे
- पुलिसिया लापरवाही: पीड़ित युवक न्याय के लिए भटकता रहा, चौकी इंचार्ज ने घंटों बैठाए रखा
बस्ती: एक तरफ जहां कानून व्यवस्था का दावा करने वाली पुलिस अपराध पर लगाम लगाने का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर ‘खाकी’ की संवेदनहीनता का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया है। दुबई से कमाकर घर लौट रहे एक युवक को बदमाशों ने अपना शिकार बनाया, लेकिन उसे न्याय दिलाने के बजाय विक्रमजोत पुलिस चौकी के इंचार्ज ने उसे घंटों बैठाए रखा और मामला अपनी सीमा से बाहर बताकर पल्ला झाड़ लिया।
क्या है पूरा मामला?
घटना के अनुसार, संतकबीरनगर जिले के घनघटा थाना क्षेत्र के अशरफपुर निवासी प्रयाग यादव शनिवार को दुबई से अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचा था। फैजाबाद हाईवे नाके पर बस का इंतजार कर रहे प्रयाग को बुलेट सवार बदमाशों ने लिफ्ट देने के बहाने बैठाया। रास्ते में विक्रमजोत स्थित मॉडल शॉप के पास बदमाशों ने स्प्रे छिड़क कर उसे बेहोश कर दिया।
52 हजार लूटे, कपड़े तक ले उड़े
बदमाश इतने शातिर थे कि बेहोशी की हालत में उन्होंने प्रयाग का अंगूठा लगाकर मोबाइल अनलॉक किया और फोन-पे के जरिए 52,000 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। हैवानियत की हद तो तब हो गई जब लुटेरे उसके कपड़े तक उतार ले गए और उसे हाईवे किनारे नहर के पास मरणासन्न हालत में छोड़कर फरार हो गए।
सीमा विवाद के खेल में पीड़ित दर-दर भटकता रहा
होश में आने के बाद जब पीड़ित ने 112 नंबर पर सूचना दी, तो पीआरवी टीम उसे विक्रमजोत चौकी ले गई। आरोप है कि विक्रमजोत चौकी इंचार्ज ने घटना को गंभीरता से लेने के बजाय पीड़ित को घंटों बैठाए रखा और बाद में उसे परशुरामपुर और सिकंदरपुर पुलिस के चक्कर कटवाते रहे। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस चौकी इंचार्ज घटना को छुपाने और अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश करते रहे।
क्या पुलिस अपराधियों के सामने लाचार है?
आज पीड़ित का मोबाइल शंकरपुर गांव के पास एक दुकान पर चार्जिंग में मिला है और सीसीटीवी फुटेज में तीन युवक भी दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस अपनी ‘सीमा’ (Jurisdiction) तय करने में व्यस्त रहेगी या अपराधियों को पकड़ने में? दुबई में खून-पसीना बहाकर कमाए गए पैसे को इस तरह लुटते देखकर और फिर पुलिसिया उदासीनता का शिकार होकर एक आम नागरिक का तंत्र से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
क्या पुलिस प्रशासन इस मामले में स्थानीय चौकी इंचार्ज की कार्यशैली की जांच कराएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?









