उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती की राजनीति में अपराध का गठजोड़: पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के साथ गांजा तस्कर सरगना और मनोनीत सभासद रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार के संबंध।

जनता अब यह सोचने पर मजबूर है कि आगामी विधानसभा चुनाव में क्या भाजपा इन दोनों की उपलब्धियों को लेकर वोट मांगने जाएगी? यदि पार्टी ने समय रहते इन दागियों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया, तो यह गठजोड़ पार्टी की हार का बड़ा कारण बन सकता है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

जिलाध्यक्ष और स्मैक तस्कर: जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र के साथ स्मैक तस्कर का सरगना मनोनीत सभासद दीपक चौहान का जुड़ाव।

  • दस किलो गांजे के साथ गिरफ्तारी: मनोनीत सदस्य रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार को पुलिस द्वारा महाकाल टी सेंटर से 10 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया जाना।
  • पद मिलते ही बढ़ा अवैध कारोबार: मनोयन के बाद तस्करों द्वारा अपने काले धंधों को और अधिक बढ़ावा दिए जाने के खुलासे।
  • फंडिंग, ठगी और रसूख के गंभीर आरोप: सांसद निधि के नाम पर लोगों से ठगी करने और अवैध कारोबार के जरिए अकूत धन कमाने के आरोप।
  • विपक्ष और मीडिया की खामोशी पर सवाल: सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की चुप्पी और स्थानीय पत्रकारों की भूमिका पर उठते सुलगते सवाल।

बस्ती। जिले में राजनीति और नशे के काले कारोबार का ऐसा गठजोड़ सामने आया है जिसने सत्ता के चरित्र पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हर्रैया से सामने आई एक अखबार की रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है – जहाँ जनता को नशा मुक्त करने का दावा किया जा रहा था, वहीं सत्ता के मंच पर ही गांजा और स्मैक के कथित सरगना सम्मानित अतिथि बने बैठे थे।

सबसे बड़ा सवाल – मनोनीत कौन कर रहा है?

हरैया क्षेत्र में गांजे के अवैध कारोबार को लेकर कुछ खास चेहरों के नाम चर्चा का विषय बने हुए हैं:

  • प्रथम पायदान के बड़े खिलाड़ी: सूत्रों की मानें तो राम सहाय और  दुर्गेश सोनकर जैसे बड़े व्यवसाई क्षेत्र में कई कुंतल गांजे का वारा-न्यारा कर रहे हैं।
  • दूसरा पायदान: इस अवैध धंधे में दीपक और सुभाष का नाम भी दूसरे पायदान पर बड़े जोर-शोर से लिया जा रहा है, जो पुलिस की आंखों में धूल झोंककर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं।

​ब्लैक स्कॉर्पियो से उतरा था गांजे का बड़ा जखीरा

​नशे के इस साम्राज्य की बानगी इसी बात से मिलती है कि कुछ हफ्ते पहले ही हरैया क्षेत्र में एक ब्लैक स्कॉर्पियो गाड़ी के जरिए गांजे की कई कुंतल बड़ी खेप उतारी गई थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस और महकमे को इसकी भनक तक नहीं लगी।

रिपोर्ट के अनुसार, बस्ती के दो चर्चित नाम इस खेल में सामने आ रहे हैं।
पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के साथ – गांजा तस्कर: मनोनीत सभासद रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार, जिसे गांजा तस्करी का सरगना बताया जा रहा है, का सीधा जुड़ाव पूर्व सांसद से बताया जा रहा है।

जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र के साथ – स्मैक तस्कर: दूसरा नाम मनोनीत सभासद दीपक चौहान का है, जिसे स्मैक का सरगना कहा जा रहा है और जिसका जुड़ाव जिलाध्यक्ष के साथ बताया जा रहा है।
जब स्कूली बच्चों को स्मैक और गांजे की लत में धकेलने के आरोपी ही सत्ता के साथ मंच साझा करें, तो सवाल लाजमी है – आखिर भाजपा के जिम्मेदारों ने इन्हें मनोनीत सभासद कैसे बना दिया? क्या योग्यता सिर्फ चुनावी फंडिंग और भीड़ जुटाना रह गई है?

पद मिला तो मिला ‘अवैध धंधे का लाइसेंस’

इस पूरे गठजोड़ की पोल तब खुली जब मनोनीत सभासद रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार को पुलिस ने महाकाल टी सेंटर से 10 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा।

सूत्रों के अनुसार पूछताछ में उसने कबूला कि मनोनीत सभासद बनने के बाद उसने धंधा बंद नहीं किया, बल्कि और तेजी से बढ़ा दिया। जैसे सत्ता का पट्टा मिलते ही उसे काले कारोबार का लाइसेंस मिल गया हो।

10 किलो या 50 किलो? ‘बाबू साहब’ कौन?

पुलिस की बरामदगी पर भी सवालों के घेरे में है। पुलिस रिकॉर्ड में 10 किलो दिखाया गया है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि बरामदगी 50 किलो से ज्यादा थी। आरोप है कि केस को कमजोर करने के लिए मात्रा कम दिखाई गई। इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक ‘बाबू साहब’ का नाम भी उछल रहा है, जो इन तस्करों का असली संरक्षक बताया जा रहा है।

सांसद निधि के नाम पर ठगी का खेल

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा है। आरोप है कि इन लोगों ने सांसद निधि से काम दिलाने के नाम पर क्षेत्र के कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की है। करीब 5 लाख रुपये का एक मामला पिछले चार साल से लटका हुआ है, जिसकी शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

विपक्ष मौन, पत्रकारिता पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल विपक्ष की चुप्पी पर भी है। जब सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों पर इतने गंभीर आरोप हैं, तो विपक्ष क्यों खामोश है? वहीं हर्रैया क्षेत्र की पत्रकारिता पर भी उंगली उठ रही है – अगर समय रहते कलम चली होती, तो यह अवैध साम्राज्य इतना न फलता-फूलता।

  • प्रमुख नेताओं और तस्करों के संबंध: बस्ती में पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के साथ गांजा तस्कर सरगना और मनोनीत सभासद रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार का नाम जुड़ा है, तथा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र के साथ स्मैक तस्कर का सरगना मनोनीत सभासद दीपक चौहान जुड़ा रहा है।
  • सुलगते सवाल और जनता का आक्रोश: जब ऐसे लोग सत्ता से जुड़े नेताओं के साथ मंच साझा करते हैं और मनोनीत सभासद बनते हैं, तो यह सवाल उठता है कि स्कूली बच्चों और नवयुवकों को नशे की लत में धकेलने वाले इन समाज के दुश्मनों को भाजपा के जिम्मेदारों ने कैसे सभासद मनोनीत कर दिया? क्या इनका उपयोग फंडिंग या चुनाव जीतने की योग्यता के आधार पर किया गया?
  • रवि गुप्त की गिरफ्तारी और खुलासे: मनोनीत सदस्य रवि गुप्त उर्फ शनि कुमार को पुलिस ने 10 किलो गांजे के साथ महाकाल टी सेंटर से पकड़कर जेल भेजा। पूछताछ में यह बात सामने आई कि पद मिलने के बाद रवि ने अपने काले धंधे को छोड़ने के बजाय अपने कारोबार में और तेजी से बढ़ोतरी की, मानो उसे अवैध कारोबार का लाइसेंस मिल गया हो।
  • बरामदगी पर सवाल: गांजा बरामदगी की मात्रा को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं हैं; कोई इसे 50 किलो बता रहा है तो कोई कह रहा है कि केस को कमजोर करने के लिए सही बरामदगी नहीं दिखाई गई और इसके मुख्य सरगना के रूप में ‘बाबू साहब’ का नाम लिया जा रहा है।
  • फंडिंग और ठगी के आरोप: चर्चा है कि इन तस्करों का संबंध बाबू साहब के साथ रहा है और इन्होंने अवैध कारोबार के जरिए न केवल अकूत पैसा कमाया, बल्कि क्षेत्र के कई लोगों को सांसद निधि का काम दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगे। करीब पांच लाख रुपये का ठगी का मामला पिछले चार साल से फंसा हुआ है।
  • मीडिया और विपक्ष की भूमिका पर सवाल: रिपोर्ट में यह भी उठाया गया है कि यदि सत्ता पक्ष के लोग इन गतिविधियों में शामिल हैं, तो विपक्ष क्यों चुप है? साथ ही हर्रैया क्षेत्र की पत्रकारिता पर भी सवाल उठाए गए हैं कि यदि पत्रकार मजबूत होते, तो इन तस्करों का अवैध कारोबार इस तरह न फूलता-फलता।

2027 का ट्रेलर?

बस्ती की जनता अब पूछ रही है – क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन्हीं उपलब्धियों के दम पर वोट मांगेगी? अगर समय रहते इन दागी मनोनीत सभासदों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया, तो यही ‘हरिशजी वाले गांजा और विवेकजी वाले स्मैक’ का गठजोड़ पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बनेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर क्षेत्र में चल रही चर्चाओं पर आधारित है। सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस विवेचना और न्यायालय से होनी बाकी है।

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