डिप्टी सीएम के दौरे से पहले सुगबुगाहट तेज: बस्ती दौरे पर आ रहे स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक, हरैया सीएचसी के औचक निरीक्षण की उठी पुरजोर मांग।
हरैया क्षेत्र की जनता को इस दौरे से उम्मीद है। लोग चाहते हैं कि मंत्री जी - • ओपीडी रजिस्टर नहीं, मौके पर मौजूद मरीजों से बात करें। • डॉक्टरों की बायोमेट्रिक हाजिरी और वास्तविक उपस्थिति का मिलान करें। • परिसर की सफाई, शौचालय, पेयजल और कुत्तों के विचरण का खुद संज्ञान लें। • लंबे समय से जमे चिकित्सकों के ट्रांसफर रिकॉर्ड की जांच कराएं।
अजीत मिश्रा (खोजी)
उपमुख्य मंत्री जी, जरा हरैया सीएचसी की तरफ भी कदम बढ़ाइए! व्यवस्थाओं का सच खुद देख लीजिए
- इलाज के केंद्र में लाचारी: हरैया सीएचसी परिसर में गंदगी, पान-गुटखे की पीक और आवारा कुत्तों का बेरोकटोक विचरण खोल रहा स्वास्थ्य दावों की पोल।
- स्थानांतरण के आदेश हवा में: ट्रांसफर के बावजूद हरैया सीएचसी में जमे हैं चहेते डॉक्टर, अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
- कागजी दावों बनाम जमीनी हकीकत: स्थानीय लोगों की दो टूक—बिना पूर्व सूचना के सीएचसी पहुंचें स्वास्थ्य मंत्री, तभी सामने आएगा बदहाली का सच।
बस्ती: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री बृजेश पाठक के संभावित बस्ती दौरे को लेकर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुगबुगाहट तेज हो गई है। कागजों में चमकने वाले अस्पतालों की हकीकत जानने के लिए स्थानीय नागरिकों और तीमारदारों ने मांग की है कि उपमुख्यमंत्री महोदय प्रोटोकॉल तोड़कर हरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का औचक (सरप्राइज) निरीक्षण करें। यदि ऐसा होता है, तो यहां की बदहाली और दावों की पोल खुद-ब-खुद खुल जाएगी।
गंदगी, गुटखे की पीक और आवारा कुत्तों का डेरा
हरैया सीएचसी इस समय इलाज का केंद्र कम और लाचारी का अड्डा ज्यादा नजर आ रहा है। अस्पताल परिसर के भीतर कदम रखते ही जो नजारा सामने आता है, वह स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सीधा तमाचा है।
- अस्वच्छता का अंबार: वार्डों से लेकर गलियारों तक गंदगी का साम्राज्य है। जगह-जगह पान और गुटखे की पीक से दीवारों का रंग बदरंग हो चुका है, जो यहां आने वाले मरीजों में संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।
- मवेशियों की शरणस्थली: अस्पताल परिसर और बरामदों में आवारा कुत्तों का बेरोकटोक विचरण आम बात हो गई है। गंभीर मरीजों के बीच घूमते ये कुत्ते स्वास्थ्य प्रशासन की संवेदनहीनता की दास्तान खुद बयां कर रहे हैं।
स्थानांतरण के बाद भी ‘जमे’ हैं चहेते डॉक्टर!
हरैया सीएचसी में प्रशासनिक और चिकित्सा व्यवस्था किस हद तक पटरी से उतरी हुई है, इसका अंदाजा चिकित्सकों की तैनाती से लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का गंभीर आरोप है कि शासन स्तर से स्थानांतरण (ट्रांसफर) आदेश जारी होने के बावजूद कई चिकित्सक लंबे समय से हरैया सीएचसी से हिलने को तैयार नहीं हैं।
आखिर किस राजनीतिक रसूख या प्रशासनिक मिलीभगत के बल पर ये डॉक्टर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं? क्या ट्रांसफर पॉलिसी केवल कागजों के लिए है? यह सवाल सीधे तौर पर जिला स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
हरैया CHC पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
1. स्वच्छता नहीं, गंदगी का अंबार: अस्पताल वह जगह है जहाँ संक्रमण से सबसे ज्यादा बचाव जरूरी है, लेकिन हरैया CHC परिसर में स्थिति उलट है। लोगों का आरोप है कि परिसर में जगह-जगह गंदगी, दीवारों पर पान-गुटखा की पीक के निशान और खुले में कूड़ा आम बात है। आवारा कुत्तों का अस्पताल परिसर और वार्ड तक में विचरण मरीजों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़ा कर रहा है।
2. ट्रांसफर के बाद भी ‘जमे’ हैं डॉक्टर?
सबसे गंभीर आरोप चिकित्सकों की तैनाती को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन स्तर से स्थानांतरण होने के बावजूद कुछ चिकित्सक जुगाड़ के बल पर वर्षों से हरैया CHC में ही जमे हुए हैं। इससे न सिर्फ शासन के आदेश की अवहेलना हो रही है, बल्कि अन्य जगहों पर डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है। यह सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन और स्थानांतरण व्यवस्था की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
3. औचक निरीक्षण ही क्यों जरूरी?
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक अपने औचक निरीक्षणों के लिए जाने जाते हैं। चाहे नल से पानी पीकर शुद्धता जांचना हो या खुद कूड़ा उठाकर सफाई का संदेश देना हो – उनकी कार्यशैली से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचता रहा है। बस्ती में ही पहले 45 हजार रुपये रिश्वत लेने वाले लिपिक पर उन्होंने तत्काल कार्रवाई की थी।
ऐसे में जनता का तर्क साफ है – यदि सूचना देकर निरीक्षण हुआ तो सब कुछ चाक-चौबंद मिलेगा। रंगाई-पुताई, अटेंडेंस पूरी, डॉक्टर हाजिर। लेकिन यदि बिना बताए हरैया पहुंचे, तो जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी।
जनता की दो टूक: औचक निरीक्षण ही खोलेगा पोल
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के दावे करने वाली सरकार के मंत्रियों के दौरों से पहले अस्पतालों में लीपापोती कर दी जाती है। यही वजह है कि जनता चाहती है कि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक बिना किसी पूर्व सूचना या तामझाम के सीधे हरैया सीएचसी पहुंचें।
जब तक औचक निरीक्षण कर जमीनी हकीकत नहीं परखी जाएगी, तब तक लापरवाह अधिकारियों और मनमाने ढंग से टिके कर्मचारियों के हौंसले बुलंद रहेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या स्वास्थ्य मंत्री जनता की इस पुकार को सुनकर हरैया सीएचसी की सुध लेते हैं या फिर व्यवस्थाएं यूं ही भगवान भरोसे चलती रहेंगी।













