उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर 

सिद्धार्थनगर: बांसी थाना क्षेत्र बना नशे का अड्डा, गांजा का कारोबार चरम पर!

जब थाने के सामने ही युवाओं का भविष्य धुएं में उड़ाया जा रहा हो, तो भला 'रक्षक' कहलाने वाली पुलिस को बुरा क्यों लगेगा? आखिर इस खुली छूट और लाखों की मलाईदार हिस्सेदारी का जो असर है! वाह रे खाकी! तुम्हारी कृपा दृष्टि से ही आज यह धंधा दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है।

सिद्धार्थनगर: बांसी थाना क्षेत्र में कानून और पुलिस की सुस्ती के बीच खुलेआम फलफूल रहा गांजे का अवैध कारोबार

सिद्धार्थनगर: जिले के बांसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नशे का अवैध कारोबार अब अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। हालात यह हैं कि जिम्मेदार विभागों और स्थानीय पुलिस की कथित रहनुमाई और संरक्षण में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब खुलेआम सड़कों पर नशे का काला कारोबार चलाया जा रहा है।

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​प्रमुख बिंदु:

  • प्रमुख स्थल: बांसी क्षेत्र के व्यस्त इलाके यानी वैष्णव भोजनालय के सामने, रोडवेज चौराहे के पास नौगढ़ रोड पर यह अवैध धंधा बेखौफ संचालित हो रहा है।
  • खुलेआम बिक्री: इसी सार्वजनिक स्थान पर युवकों द्वारा सरेआम गांजे और नशे के सामान का सौदा किया जा रहा है, जिस पर स्थानीय पुलिस की आंखें पूरी तरह मूंदी हुई हैं।
  • युवा पीढ़ी की बर्बादी: इस जहरीले कारोबार की गिरफ्त में आकर क्षेत्र की युवा पीढ़ी का भविष्य लगातार बर्बाद हो रहा है, लेकिन नींद में सोए प्रशासन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा।
  • रक्षक ही बने भक्षक: जब जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस खुद ही इस अवैध साम्राज्य की हिस्सेदार बन जाए, तो आम नागरिकों को न्याय की उम्मीद किससे हो? यह सबसे बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
  • जनता का आक्रोश और खौफ: इस कारगुजारी के कारण आम जनता के भीतर भारी आक्रोश व्याप्त है, हालांकि अपराधियों और पुलिस गठजोड़ के खौफ के साए में लोगों की आवाजें दबी हुई हैं।

​हालत यह हो चुकी है कि अब अपराधियों को छुपने के लिए किसी अंधेरे कोने या सुनसान खंडहर की जरूरत नहीं है। बांसी में वैष्णव भोजनालय के सामने, रोडवेज चौराहे के पास नौगढ़ रोड जैसी व्यस्त और प्रमुख जगहों पर खुलेआम गांजे की पुड़िया ऐसे बिक रही हैं, जैसे कोई मेले में प्रसाद बंट रहा हो! चौराहे से गुजरने वाले आम लोग और कानून दोनों तमाशबीन बनकर बस नजारा देख रहे हैं।

​जब थाने के सामने ही युवाओं का भविष्य धुएं में उड़ाया जा रहा हो, तो भला ‘रक्षक’ कहलाने वाली पुलिस को बुरा क्यों लगेगा? आखिर इस खुली छूट और लाखों की मलाईदार हिस्सेदारी का जो असर है! वाह रे खाकी! तुम्हारी कृपा दृष्टि से ही आज यह धंधा दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है।

​युवा पीढ़ी चाहे नशे की गर्त में डूबकर बर्बाद हो जाए, पर ‘जिम्मेदारों’ के खर्राटे में कोई खलल नहीं पड़ना चाहिए। जनता के सीने में आक्रोश का लावा खौल रहा है, लेकिन खाकी और माफिया के खौफ ने सबकी जुबान पर ताले जड़ रखे हैं।

​अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस नींद से जगाने के लिए कोई आला अधिकारी आएगा या फिर बांसी का यह चौराहा यूँ ही ‘नशामुक्ति’ की जगह ‘नशा-फैक्ट्री’ बना रहेगा! अब देखना यह लाजिमी होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस खबर का संज्ञान लेकर सोते हुए प्रशासन को जगाएंगे या फिर मिलीभगत का यह खेल यूं ही मासूम युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करता रहेगा।

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