
देश की जनता एक गंभीर प्रश्न करना चाह रही है मीडीया और न्यूज चैनलों *news18, *znews, aajtak से कि “”TV debate “” पर एक अस्तित्व हिन निराधार और बिना जनाधार वाले राजनीतिक दल “”CPI,CPM “” को क्यों बुलाते हो ??? यह अब तो राष्ट्रीय पार्टी के रूप में भी नहीं जाना जाता ,
जिस पार्टी का प्रतिनिधित्व 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित राज्यों में नगण्य हो , सिर्फ केरल में सिमट गया हो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देकर टी वी डीबेट पर बुलाना जनता और अन्य दलों को अवहेलना करना सिद्ध करता है ।
वो भी घोर आश्चर्य कि हर बार CPI,CPM का प्रवक्ता एक ही व्यक्ति नाम ” विवेक श्रीवास्तव” ,जिसे संवाद करने का ढ़ंग नहीं , वो अपने आप को इतना ज्ञानी समझता है कि हिन्दू सन्यासी या धर्म गुरु के साथ भी छिछोलापन जैसा बहस करता है।
आंकड़ों के अनुसार CPI,CPM एक ऐतिहासिक पार्टी बन गया है, जिसका आधिपत्य एक समय में बंगाल, त्रिपुरा में था । 2004 के लोकसभा में इसके 60 सांसद थे ,जो ” UPA” सरकार को बाहर से समर्थन दे रखा था ,पर 2024 में इसकी संख्या लोकसभा में “8” पर सिमट गया है। राज्यों की बात करें तो सिर्फ केरल में वामपंथी कांग्रेस के साथ सरकार चला रहा है ।
ऐसे पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का ओहदा क्यों दिया जा रहा है??? कि उसके प्रवक्ता को हर डीबेट में बुलाया जाता है।
देश में बहुजन समाज पार्टी, अकाली दल, नेशनल कांफ्रेंस, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कई दल हैं जिनके पास कम्युनिस्टों से कई गुना अधिक सांसद, विधायक और वोट बैंक है, लेकिन उन्हें कभी भी हर डिबेट में नहीं बुलाया जाता। फिर एक ऐसी पार्टी जिसके पास देश के कुल वोटों में एक प्रतिशत से भी कम वोट है, उसे हर शाम हर चैनल पर बिठाकर क्या संदेश दिया जा रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हर पार्टी का प्रवक्ता बदलते रहता है पर वामपंथी के पास एक ही ज्ञानी बचा हुआ है विवेक श्रीवास्तव,जो हर चैनल पर मौजूद रहता है । और यह व्यक्ति किसी चुनाव में जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है, किसी बड़े जन-आंदोलन का नेता नहीं है, फिर भी वह हर विषय पर, चाहे वह हिंदू धर्म हो, राम मंदिर हो, सेना हो, विदेश नीति हो, आर्थिक नीति हो, हर विषय पर वामपंथी दृष्टिकोण को ही अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करता है। अर्थात क्या “”चैनलों “” ने जानबूझकर एक ऐसे व्यक्ति को चुन लिया है जो हर क्षेत्र में बेतूका बकवास कर “टी वी”का TRP बढ़ाए???
आज पूरी दुनिया जानती है कि चीन किस तरह से अपने विस्तारवादी एजेंडे के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में मीडिया, शिक्षा संस्थानों और थिंक टैंकों में पैसा लगाता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों में इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी वहां की यूनिवर्सिटीज और मीडिया को फंडिंग करके अपने अनुकूल नैरेटिव बनवाती है।
तो क्या भारत में भी चीन से फंडिंग होने वाले न्यूज नेटवर्क नहीं है?? जो भारत विरोधी “propaganda””फैलाने का काम करता है। यही बामपंथी किसान आंदोलन,”caa”, काक्रोच गिरोह में सक्रिय था।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं कम्युनिस्ट पार्टी, जो कि विचारधारा के स्तर पर आज भी चीन को ही अपना आदर्श मानती है, जिसने 1962 के युद्ध में भी चीन का समर्थन किया था, जिसने संसद में चीन के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया था, उस पार्टी को टीवी पर जबरदस्ती जिंदा रखने के पीछे कहीं उसी विस्तारवादी फंडिंग का खेल तो नहीं है ??? क्या कुछ चैनलों को यह फंडिंग सीधे या परोक्ष रूप से इस शर्त पर दी जाती है कि वे वामपंथी विचारों को प्राइम टाइम में जगह देंगे और राष्ट्रवादी विचारों को बदनाम करेंगे। यह एक गंभीर राष्ट्रीयदेश की जनता एक गंभीर प्रश्न करना चाह रही है मीडीया और न्यूज चैनलों *news18, *znews, aajtak से कि “”TV debate “” पर एक अस्तित्व हिन निराधार और बिना जनाधार वाले राजनीतिक दल “”CPI,CPM “” को क्यों बुलाते हो ??? यह अब तो राष्ट्रीय पार्टी के रूप में भी नहीं जाना जाता ,
जिस पार्टी का प्रतिनिधित्व 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित राज्यों में नगण्य हो , सिर्फ केरल में सिमट गया हो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देकर टी वी डीबेट पर बुलाना जनता और अन्य दलों को अवहेलना करना सिद्ध करता है ।
वो भी घोर आश्चर्य कि हर बार CPI,CPM का प्रवक्ता एक ही व्यक्ति नाम ” विवेक श्रीवास्तव” ,जिसे संवाद करने का ढ़ंग नहीं , वो अपने आप को इतना ज्ञानी समझता है कि हिन्दू सन्यासी या धर्म गुरु के साथ भी छिछोलापन जैसा बहस करता है।
आंकड़ों के अनुसार CPI,CPM एक ऐतिहासिक पार्टी बन गया है, जिसका आधिपत्य एक समय में बंगाल, त्रिपुरा में था । 2004 के लोकसभा में इसके 60 सांसद थे ,जो ” UPA” सरकार को बाहर से समर्थन दे रखा था ,पर 2024 में इसकी संख्या लोकसभा में “8” पर सिमट गया है। राज्यों की बात करें तो सिर्फ केरल में वामपंथी कांग्रेस के साथ सरकार चला रहा है ।
ऐसे पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का ओहदा क्यों दिया जा रहा है??? कि उसके प्रवक्ता को हर डीबेट में बुलाया जाता है।
देश में बहुजन समाज पार्टी, अकाली दल, नेशनल कांफ्रेंस, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कई दल हैं जिनके पास कम्युनिस्टों से कई गुना अधिक सांसद, विधायक और वोट बैंक है, लेकिन उन्हें कभी भी हर डिबेट में नहीं बुलाया जाता। फिर एक ऐसी पार्टी जिसके पास देश के कुल वोटों में एक प्रतिशत से भी कम वोट है, उसे हर शाम हर चैनल पर बिठाकर क्या संदेश दिया जा रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हर पार्टी का प्रवक्ता बदलते रहता है पर वामपंथी के पास एक ही ज्ञानी बचा हुआ है विवेक श्रीवास्तव,जो हर चैनल पर मौजूद रहता है । और यह व्यक्ति किसी चुनाव में जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है, किसी बड़े जन-आंदोलन का नेता नहीं है, फिर भी वह हर विषय पर, चाहे वह हिंदू धर्म हो, राम मंदिर हो, सेना हो, विदेश नीति हो, आर्थिक नीति हो, हर विषय पर वामपंथी दृष्टिकोण को ही अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करता है। अर्थात क्या “”चैनलों “” ने जानबूझकर एक ऐसे व्यक्ति को चुन लिया है जो हर क्षेत्र में बेतूका बकवास कर “टी वी”का TRP बढ़ाए???
आज पूरी दुनिया जानती है कि चीन किस तरह से अपने विस्तारवादी एजेंडे के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में मीडिया, शिक्षा संस्थानों और थिंक टैंकों में पैसा लगाता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों में इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी वहां की यूनिवर्सिटीज और मीडिया को फंडिंग करके अपने अनुकूल नैरेटिव बनवाती है।
तो क्या भारत में भी चीन से फंडिंग होने वाले न्यूज नेटवर्क नहीं है?? जो भारत विरोधी “propaganda””फैलाने का काम करता है। यही बामपंथी किसान आंदोलन,”caa”, काक्रोच गिरोह में सक्रिय था।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं कम्युनिस्ट पार्टी, जो कि विचारधारा के स्तर पर आज भी चीन को ही अपना आदर्श मानती है, जिसने 1962 के युद्ध में भी चीन का समर्थन किया था, जिसने संसद में चीन के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया था, उस पार्टी को टीवी पर जबरदस्ती जिंदा रखने के पीछे कहीं उसी विस्तारवादी फंडिंग का खेल तो नहीं है ??? क्या कुछ चैनलों को यह फंडिंग सीधे या परोक्ष रूप से इस शर्त पर दी जाती है कि वे वामपंथी विचारों को प्राइम टाइम में जगह देंगे और राष्ट्रवादी विचारों को बदनाम करेंगे। यह एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। जांच के घेरे में इन चैनलों को लेना चाहिए।
भारत की जनता ने कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी विचारधारा को पूरी तरह से नकार दिया है। उसके विचारों को न तो कोई पसंद करता है और न समर्थन करता है। फिर भी अगर टीवी चैनल उसे जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है। इसे रोकना ही देश हित में होगा।
सुरक्षा का विषय है। जांच के घेरे में इन चैनलों को लेना चाहिए।
भारत की जनता ने कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी विचारधारा को पूरी तरह से नकार दिया है। उसके विचारों को न तो कोई पसंद करता है और न समर्थन करता है। फिर भी अगर टीवी चैनल उसे जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है। इसे रोकना ही देश हित में होगा।







