
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान से गूंज रहे जिनालय
महानगर के खिरनी गेट पर स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगम्बर जैन मंदिर मे चल रहे श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के द्वितीय दिवस श्रीजी के समझ श्रावक श्राविकाओं ने 16 अर्घ्य समर्पित किए । प्रात : सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक हुआ । हर एक श्रद्धालु को सिद्धचक्र महामंडल विधान करना चाहिए | क्योंकि अंतिम लक्ष्य के रूप में संसारी प्राणी मोक्ष नहीं पा सकता है । इसलिए सिद्धों की आराधना के बिना मोक्ष का लक्ष्य सिद्ध नहीं हो सकता । यह बात मुनि श्री ने विधान में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कही उन्होंने कहा कि सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य कृत्य । चक्र का अर्थ है समूह और | मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृताकार यंत्र से है । इनमें अनेक प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है । मंत्र शास्त्र के अनुसार , इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है । सिद्धचक्र महामंडल विधान समस्त सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है । जो हमारे समस्त मनोरथों को पूर्ण करती है । कार्यक्रम का निर्देशन बा . ब्र . बसंती दीदी एवं कल्पना दीदी ने किया । सभी के वात्सल्य भोजन के पुण्यार्जक संजय जैन साउंड वाले परिवार रहे । सायंकाल मंदिर में श्रीजी की आरती , | भक्ति करने के साथ – साथ प्रश्नोत्तरी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुए किए गए । कार्यक्रम मे पुरुष , महिलायें , बच्चें उपस्थित रहे ।





