
भयमुक्त, न्याययुक्त, धर्मयुक्त समाज के संस्थापक थे भगवान श्रीकृष्ण — आर के पाण्डेय एडवोकेट।
— आदर्श मानव जीवन के प्रेरणा स्रोत हैं श्रीकृष्ण।
प्रयागराज। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह के अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता, पीडब्ल्यूएस प्रमुख व राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार नियंत्रण ब्यूरो के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर के पाण्डेय एडवोकेट ने भगवान श्रीकृष्ण को भयमुक्त, न्याययुक्त, धर्मयुक्त्त समाज का संस्थापक बताया है।
उपरोक्त के संदर्भ में मीडिया से वार्ता में आर पाण्डेय एडवोकेट ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म विपरीत परिस्थितियों में कंस जैसे अत्याचारी शासक के जेल में हुआ। एक राजकुमार होने के बावजूद उनका बचपन ग्वाल बालों के बीच में बीता। इन सब के बावजूद उन्होंने बचपन से ही आतंकियों का संहार करते हुए आम जनमानस को भयमुक्त वातावरण देने, अन्याय के विरुद्ध विशेष अभियान चला करके लोगों को न्याययुक्त समाज तथा धर्म की स्थापना के साथ धर्मयुक्त समाज की स्थापना किया। एक तरफ अभाव के बीच में अपने बचपन में अनेकों संघर्ष करते हुए श्रीकृष्ण जी ने अत्याचारियों, आतंकियों, राक्षसों से समाज की रक्षा की। वहीं पर वह आचार्य संदीपन के आश्रम में सुदामा जैसे निर्धन बेसहारा बच्चों के साथ में शिक्षा ग्रहण करने के साथ उन्हें संरक्षण प्रदान किया। यही श्रीकृष्ण आगे चलकर महाभारत युद्ध के दौरान गीता का उपदेश देते हैं और धर्म के रास्ते पर चल रहे पांडवों का साथ देकर कौरवों को पराजित कराते हुए धर्म की रक्षा करते हुए धर्मयुक्त समाज की स्थापना करते हैं। आर के पाण्डेय ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन आम जनमानस के लिए एक आदर्श जीवन है जिससे हम बचपन से लेकर जीवन के अंत तक प्रत्येक क्षण भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से शिक्षा ग्रहण करके स्वयं को एक भयमुक्त, न्याययुक्त, धर्मयुक्त समाज का अंग बना सकते हैं।





