बलिया प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा शासन चाहता है कि प्रदेश में शांति सुरक्षा और न्याय मिल पाए।
लेकिन सरकार के प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों के रूप में नियुक्त सरकारी कर्मचारियों द्वारा गरीबों मजलूमों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
वर्तमान समय में कतिपय तहसीलदार और लेखपाल मलाई काटने के चक्कर में सीधे-साधे और ईमानदार भू स्वामियों को बेदखल करके भूमाफियाओं और कूटरचना करने वाले आपराधिक चरित्र के व्यक्तियों की मदद करना शुरू कर देते हैं। जिससे पीड़ित भु स्वामियों व उनका परिवार दर दर की ठोकर खाता है।
जी हां हम बात कर रहे हैं बांसडीह के तहसीलदार और लेखपाल की। जिन्होंने माननीय न्यायालय के आदेश के खिलाफ फर्जी आख्या प्रस्तुत कर दिया। जिसे न्यायालय के आदेश पर कोतवाल बांसडीह ने बांसडीह के तहसीलदार और लेखपाल पर गलत आख्या प्रस्तुत करने के जुर्म में धोखाधड़ी, एससी/ एसटी एक्ट और मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से जिले के समस्त तहसीलों के भ्रष्टाचार में लिप्त कतिपय तहसीलदारों और लेखपालों में हड़कंप मच गया है।
बलिया जनपद के समस्त तहसीलों में तहसीलदार और लेखपाल की शिकायतें जिलाधिकारी के यहां की जाती है। लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा विभागीय होने के नाते भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को बचा लिया जाता है। जिससे कानून व्यवस्था ध्वस्त हो जाता है। उक्त मामले में विवेचना भी जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुखपुरा गांव निवासी अनुसूचित जाति के शेषनाथ राम का अपने गांव के ही दिलीप गुप्ता से मारपीट हुआ था।उसने आरोप लगाया कि उनके विपक्षियों ने घर में घुसकर उनको और उनके पूरे परिवार को पीटा था। मारपीट का मामला सुखपुरा थाने में दर्ज हुआ।इसी बीच विवेचक द्वारा पीड़ित शेषनाथ राम से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जमा करने की बात की गई। जिस पर शेष नाथ राम ने अपना प्रमाण पत्र भी जमा किया।जिसको सत्यापित करने के लिए तहसीलदार बांसडीह द्वारा संबंधित अधिकारियों के पास भेज दिया गया।इधर लेखपाल ओम जी गुप्ता द्वारा अपने रिश्तेदार आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से पीड़ित शेषनाथ राम को पिछड़ी जाति का बताते हुए आख्या प्रस्तुत कर दिया गया। जिसे संबंधित तहसीलदार द्वारा भी सत्यापित कर दिया।
शेषनाथ राम ने आरोप लगाया कि जब इस बात की शिकायत मैंने संबंधित लेखपाल से किया तो लेखपाल द्वारा उन्हें जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उनके साथ गाली गलौज और मारपीट की गई। बांसडीह कोतवाल संजय सिंह द्वारा तहसीलदार और लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच की कार्रवाई चल रही है।
मुकदमे में आरोपी तहसीलदार निखिल शुक्ला द्वारा बताया गया कि उक्त मामले में एक पक्षीय कार्रवाई की गई है। जो विधि विरुद्ध और गलत है। ज्ञातव्य हो कि आरोपी तहसीलदार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मामले में माननीय उच्च न्यायालय और विजिलेंस कोर्ट में अपील की गई है। उन्हें उम्मीद है कि सब कुछ दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।