
सिद्धार्थनगर। परिषदीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा का दावा जिले में बेदम साबित हो रहा है। किताबें कबाड़ी के यहां और बीआरसी के कमरे से बेच दी जा रही है या स्कूल तक पहुंचाने का किराया बचाने के फेर में वही सड़ रही हैं। वहीं, बच्चे बिना किताब और पुरानी किताबों से भविष्य गढ़ रहे हैं। अधिकांश विद्यालय ऐसे हैं कि जहां पर कुछ किताबें पहुंची है तो कुछ नहीं पहुंची हैं। किसी-किसी कक्षा की एक भी किताब नहीं मिली है। बच्चे पड़ोस में पढ़ने वाले बच्चों की पुरानी की किताबें लेकर आ रहे हैं तो कुछ बच्चे किताब न होने से समूह में बैठकर एक किताब से पढ़ाई कर रहे हैं। किताब नहीं मिलने के सवाल पर बच्चे कुछ सटीक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, अभिभावक जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। बांसी बीआरसी की किताबें कबाड़ी के यहां बेचे जाने के मामले के बाद अफसरों के शतप्रतिश किताब वितरण के दावे की हकीकत जानने के लिए बांसी और भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के विद्यालयों की पड़ताल की गई तो यह चौंका देने वाला सच सामने आया।
कक्षा छह की इतिहास, अंग्रेजी, भूगोल, गणित और हिंदी की पुस्तकें नहीं मिली है। कक्षा सात की गृह कौशल की पुस्तक नहीं मिली है। प्राथमिक विद्यालय नवडिहवां द्वितीय में कक्षा तीन एवं पांच में हिंदी की पुस्तक अभी नहीं मिली है। प्राथमिक विद्यालय कदमहवा में अधिकतर बच्चों के पास पुस्तक नहीं मिली। वहीं विकास खंड भनवापुर के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय बिस्कोहर के विद्यार्थियों को पूरे विषयों की किताबें अभी तक नहीं मिली हैं।
किसी कक्षा की दो पुस्तकें और किसी की एक पुस्तकें विद्यार्थियों को मिली हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी बांसी अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के मामले की जानकारी नहीं है। जल्दी पता करवाते हैं।






