

समीर वानखेड़े चंद्रपुर महाराष्ट्र:
गढ़चिरौली जिले में अहेरी निर्वाचन क्षेत्र अत्राम राजवंश का एक पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र है। दक्षिण गढ़चिरौली के आदिवासी मतदाताओं पर प्रभाव रखने वाले इस अत्राम शाही परिवार में महाराष्ट्र के मतदाता और जनता एक नई लड़ाई देख रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि महाराष्ट्र में बाप बेटी की यह पहली लड़ाई है। पहली बार पिता-पुत्री के बीच सियासी घमासान छिड़ा है जब परिवार में बंटवारे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
अलापल्ली में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की उपस्थिति में जनसंमान यात्रा के दौरान बेटी और दामाद के बारे में राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री धर्मराव बाबा अत्राम द्वारा दिए गए बयान से अहेरी तहसील में राजनीतिक माहौल प्रभावित हुआ है। इसके बाद 12 सितंबर को मंत्री अत्राम की बेटी भाग्यश्री अत्राम ने एनसीपी शरद पवार गुट में प्रवेश किया। इसलिए प्रदेश की राजनीति में पहली बार पिता-पुत्री के बीच राजनीतिक टकराव पैदा हो गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो गया है। ऐसे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार और राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री धरमराव बाबा अत्राम को उनकी ही बड़ी बेटी ने चुनौती दी है, इससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद अत्राम राजघराने में राजनीतिक विवाद की चिंगारी भड़क गई है। मंत्री धर्मराव बाबा अत्राम की रुचि लोकसभा में थी। लेकिन उन्हें समय पर नामांकन नहीं मिला । इसके चलते उन्होंने विधानसभा पर फोकस किया। हालाँकि, उनकी बड़ी बेटी भाग्यश्री अत्रम, दामाद ऋतुराज हल्गेकर की भी विधानसभा में रुचि होने के कारण घर में सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। इसलिए धर्मराव बाबा अत्राम के नेतृत्व में पले-बढ़े बेटी और दामाद अब उन्हें चुनौती दे रहे हैं।
इसी बीच 6 सितंबर को जन सम्मान यात्रा के दौरान जब मंत्री अत्राम ने भीड़ के सामने भाषण दिया तो जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में इसकी चर्चा शुरू हो गई। जिला परिषद अध्यक्ष, निर्माण सभापति समेत विभिन्न राजनीतिक पदों पर रह चुकीं भाग्यश्री अत्राम पिछले कुछ दिनों से शरद पवार गुट के संपर्क में थीं। अनिल देशमुख ने भी समय-समय पर इस पर टिप्पणी की थी। 12 सितंबर को अहेरी में भाग्यश्री अत्राम और उनके पति ऋतुराज हल्गेकर को उनके समर्थकों के साथ शरद पवार गुट में शामिल होने की चर्चा हुई और अंततः वही हुआ जो अपरिहार्य था और अंततः भागेश्री अत्राम हल्गेकर ने अपने पिता का साथ छोड़ दिया। जयंत पाटिल, अनिल देशमुख की मौजूदगी में भाग्यश्री अत्रम की शरद पवार गुट में एंट्री की । इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब गढ़चिरौली के अहेरी निर्वाचन क्षेत्र में पिता-पुत्री के बीच राजनीतिक संघर्ष चल रहा है, तो अजीत पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी के बीच लड़ाई में कौन जीतेगा।
हालांकि भाग्यश्री आत्राम ने अपने पिता के खिलाफ बगावत कर दी थी, लेकिन उनके पिता ने चुनौती स्वीकार कर ली और पचास साल के राजनीतिक जीवन में निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए किए गए कार्यों का लेखा-जोखा मतदाताओं के सामने रखना शुरू कर दिया। इसलिए आने वाले समय में ही पता चलेगा कि मतदाता राजा असल में किसके पलड़े में वोट डालकर जीत पर मुहर लगाता है।










