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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं के तहत काशी को स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। दोनों नेताओं के काशी दौरे और यहां के विकास के लिए करोड़ों रुपये की सौगातें देने के बावजूद शहर के कुछ इलाकों में विकास का लाभ नहीं पहुंच पाया है। इसका एक ज्वलंत उदाहरण वाराणसी के मुस्लिम बाहुल्य इलाके बजरडीहा में देखने को मिल रहा है, जहां सीवर की समस्या ने लोगों का जीवन दुश्वार बना दिया है।

वाराणसी: बजरडीहा खोजवा कश्मीरीगज में सीवर की गंदगी से जूझ रहे लोग, गंदे पानी में तैर रहा ‘विकास’, घरों में घुसा मलजल, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन

वाराणसी: बजरडीहा में सीवर की गंदगी से जूझ रहे लोग, गंदे पानी में तैर रहा ‘विकास’, घरों में घुसा मलजल, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन

चन्दौली वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं के तहत काशी को स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। दोनों नेताओं के काशी दौरे और यहां के विकास के लिए करोड़ों रुपये की सौगातें देने के बावजूद शहर के कुछ इलाकों में विकास का लाभ नहीं पहुंच पाया है। इसका एक ज्वलंत उदाहरण वाराणसी के मुस्लिम बाहुल्य इलाके बजरडीहा में देखने को मिल रहा है, जहां सीवर की समस्या ने लोगों का जीवन दुश्वार बना दिया है।बजरडीहा इलाके में स्थित सड़कें और गलियां सीवर के पानी से भर चुकी हैं। यहां के लोग गंदे पानी में से होकर अपने घरों से काम पर और फिर काम से घर लौटने को मजबूर हैं। यह स्थिति इतनी खराब हो गई है कि सीवर का पानी सड़क पर बह रहा है और लोग गंदगी में चलने को विवश हैं। चौराहों से लेकर गलियों तक गंदे पानी का साम्राज्य है, और कई घरों में तो मलजल भी घुस चुका है।स्थानीय निवासी इस समस्या से काफी परेशान हैं और उन्होंने कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाया है। हालांकि, उनका कहना है कि कोई सुनवाई नहीं हो रही। यहां के पार्षद भी चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच नहीं दिखाई देते। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह समस्या वर्षों से बनी हुई है और नगर निगम के अधिकारी कागजों में कामों को सही दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही हैलोगों का कहना है कि सीवर की समस्या के कारण उनका जीवन नारकीय हो गया है। हर दिन गंदे पानी से होकर गुजरना उनकी मजबूरी बन चुकी है। बावजूद इसके, कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। यह स्थिति विकास के दावों और वादों की पोल खोलती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों कुछ इलाकों में विकास के लाभ नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि अन्य जगहों पर लाखों करोड़ों की राशि खर्च की जा रही है।

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