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ग्राम गंधावड़ में आयोजित श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा के द्वितीय दिवस कथावाचिका ब्रह्मवादिनी बहन सुनीता पाटीदार ने कहा,पत्थर को देवता बनाना आसान है लेकिन मनुष्य को देवता बनाना बहुत मुश्किल है*

*पत्थर को देवता बनाना आसान है लेकिन मनुष्य को देवता बनाना बहुत मुश्किल है* – *सुनीता पाटीदार*
सेगाव/-मातृ श्रद्धांजलि वर्ष 2026 के अंतर्गत देव ग्राम गंधावड़ में आयोजित श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा के द्वितीय दिवस कथावाचिका ब्रह्मवादिनी बहन सुनीता पाटीदार ने कहा कि पत्थर को देवता बनाना आसान है लेकिन मनुष्य को देवता बनाना उतना ही कठिन है। ग्रंथ कहते जीवात्मा चौरासी लाख यौनियो में भ्रमण कर मनुष्य शरीर को धारण करती है।पूर्व जन्म के कुसंस्कार भटकाव उत्पन्न करते है। इस भ्रम के जंजाल से उभरने में समर्थ सदगुरू ही शक्ति प्रदान करते है और सोया देवत्व जागते।जिससे मानव, देवमानव,महामानव बनता हुआ स्वयं के साथ अनेकों व्यक्तियों के जीवन का भी उद्धार करता है। इसी प्रकिया को देवसंस्कृति में संस्कार कहते है।
प्रज्ञा पुराण में गुरुदेव कहते है मनुष्य जीवन में सुख दुख लाभ हानि उसके वर्तमान या पूर्व जन्म के कर्मों का फल होता। भगवान ने कर्म करने की स्वतंत्रता दी है उसका फल स्वयं के हाथों में रखा है। जैसी करनी वैसा फल आज भी तो निश्चित कल अतः सत्कर्म कर अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करे। कर्म बनते विचार से विचार बनते भाव से ओर सद्भाव जगाता हैं गायत्री मंत्र। आइए साधना से सिद्धि को प्राप्त करे। कथा श्रवण हेतु रामकथा वाचक आदरणीय मोहन भाई जी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर प्रज्ञा पुराण की महाआरती में भागीदारी कर आशीर्वचन प्रदान किए।
सेगाँव से प्रवीण यादव की खबर
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