
ठंड में सड़क पर उतरे बीएडधारी शिक्षक, डबल इंजन सरकार पर लगाया बेरोजगारी का आरोप
लखनऊ: राजधानी की सड़कों पर बीएडधारी शिक्षकों का संघर्ष इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। डबल इंजन सरकार में नौकरी गंवा चुके शिक्षक कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर लेटकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों और बेरुखी के कारण वे रोजगार से वंचित हो गए हैं।
संघर्ष का कारण
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों और नौकरियों के वितरण में अनियमितता के कारण वे बेरोजगारी झेलने को मजबूर हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी योग्यताओं के बावजूद, उनकी नौकरियां छीन ली गईं और नए पदों पर नियुक्तियां केवल “पक्षपात और भ्रष्टाचार” के आधार पर की जा रही हैं।
सड़क पर संघर्ष
कड़कड़ाती ठंड में, शिक्षक सड़कों पर लेटकर और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध जता रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगें सुनने को तैयार नहीं है और उनके साथ अन्याय हो रहा है।
शिक्षकों की मांगे
- नौकरी से निकाले गए शिक्षकों को तत्काल बहाल किया जाए।
- बीएडधारी शिक्षकों को उनके अधिकारों के अनुसार नौकरी दी जाए।
- नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।
सरकार का रुख
सरकार ने अब तक इस मामले पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही संबंधित विभागों के साथ चर्चा की जा सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि डबल इंजन की सरकार केवल विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
निष्कर्ष
बीएडधारी शिक्षकों का यह संघर्ष केवल नौकरी का नहीं, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता के लिए भी है। सरकार को इन शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान निकालने की आवश्यकता है।
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एलिक सिंह
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