
समीर वानखेड़े:
गोंदिया जिला शल्य चिकित्सक के पद पर जबरदस्ती जमे हुए अमरीश मोहबे के खिलाफ डॉ बाजपेई ने लगभग पिछले 8 माह से मोर्चा खोल रखा है और मोहबे द्वारा की गई सभी अनियमितताओं को उन्होंने बारी बारी से उजागर किया है जिसमें मरे हुए लोगों को जीवित होने का प्रमाण पत्र, फर्टिलिटी दंपति को इनफर्टिलिटी का प्रमाण पत्र, अवैध नर्सिंग होम और अवैध सोनोग्राफी सेंटरों को मंजूरी, जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर से अलग-अलग रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसों की वसूली आदि प्रकरणों में मोहबे दोषी पाए गए थे जिसके फल स्वरूप उन्हें डिमोशन के साथ गढ़चिरौली में क्लास 2 की पोस्ट पर बदली की गई थी परंतु मोहबे ने एक नक्सलाइट एरिया में 3 साल तक काम किए जाने का हवाला देकर वापस दूसरे नक्सलाइट एरिया में बदलि कि बात कह कर मैट कोर्ट से स्टेटस को लाने में सफल हुए थे जिस पर मैट कोर्ट द्वारा स्टेटस को उन्हें मिला था परंतु मोहबे गोंदिया से रिलीव्ड हो चुके थे इसका मतलब यह है कि मोहबे जैसे थे उन्हें वैसे ही रहना चाहिए था। डिपार्टमेंट के नाक में दम करके गोंदिया में जबरदस्ती सीएस की पोस्ट पर आकर बैठ गए और पूरा सीएस का कार्यभार संभालना शुरू कर दिया जो की कानूनी रूप से गलत है। परंतु मोहबे अपने भ्रष्टाचार और पैसों के दम पर पूरे स्वास्थ्य विभाग को चुनौती दे रहे हैं। मैट कोर्ट के अगले आदेश तक मोहबे को रिलीवीड ही रहना था परन्तु स्वास्थ विभाग को जमकर लक्ष्मी दर्शन करवाकर मोहबे सीएस के पद पर बने रहने में सफल हुवे हैं। डॉ बाजपेई ने उपसंचालक शंभरकर को अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि मोहबे को गोंदिया के जिला शल्य चिकित्सक के पद से तत्काल प्रभाव से हटकर अन्य डॉक्टर को जिला शल्य चिकित्सक का प्रभार दिया जाना आवश्यक है यदि ऐसा नहीं किया गया तो मोहबे के भ्रष्टाचार को लगातार बल मिलेगा और इसके साथ ही उपसंचालक की भूमिका पर भी अनेक सवाल खड़े होंगे इसलिए मोहबे को तत्काल गोंदिया से रवाना करना आवश्यक है यह मांग डॉक्टर बाजपेई ने अपने पत्र में उपसंचालक को पत्र लिखकर की है।













