



#विशेष पड़ताल: फतेहपुर में दलित ट्रैक्टर चालक पर अत्याचार, ब्लैकमेलिंग और निष्पक्ष पत्रकार को बदनाम करने की साजिश…!!#
सहारनपुर (फतेहपुर):: थाना फतेहपुर के साहसपुर गांव में एक दलित किसान ट्रैक्टर चालक, सोनू कुमार, पुत्र किरणपाल, के साथ हुए जघन्य अत्याचार ने सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष पत्रकारिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनू ने अपनी तहरीर में बताया कि वह अपने खेत से मिट्टी लेकर अपने प्लॉट पर भराव कर रहा था, तभी नीटू सैनी, फुरकान मलिक और जुल्फान मलिक ने जातिसूचक गालियां दीं, मारपीट की, 20,000 रुपये की उगाही की मांग की और पैसे न देने पर जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। पीड़ित ने थाना फतेहपुर में शिकायत दर्ज कर अपने और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस घटना ने गांव में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, फुरकान मलिक का आपराधिक इतिहास रहा है; वह देहरादून में लूट के मामले में जेल जा चुका है और फतेहपुर में ठगी के कई मामलों में आरोपी है। नीटू सैनी पर तांत्रिक गतिविधियों के नाम पर लोगों को डराकर ठगने के आरोप हैं। हाल ही में अलेहड़ी गांव में इस गिरोह ने ट्रैक्टर रोककर अवैध वसूली की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के विरोध पर भाग खड़े हुए। यह एक आपराधिक गिरोह है, जो पत्रकारिता का चोला ओढ़कर रात के अंधेरे में चोरों की तरह उगाही करता है, उसका रास्ता रोका। इस गिरोह ने पत्रकारिता की आड़ में पुलिस कर्मियों तक फर्जी शिकायत करते हैं, जिसका पुलिस जांच में खुलासा हो चुका है, एक ठेकेदार ने पुलिस के सामने पूर्व में कबूल किया था कि उससे पुलिस की फर्जी शिकायत कारवाई गई थी. पूरे मामले का खुलासा करते हुए इस बीच, एक साहसी पत्रकार ने दलित किसान की आवाज बुलंद की और इस संगठित अपराध की पोल खोली दी। जवाब में, गिरोह ने पत्रकार को बदनाम करने की साजिश रची। एक कथित ठग, जो नगर निगम के फर्जीवाड़ों में लिप्त है, ने फर्जी खबरें और अफवाहें फैलाकर पत्रकार और दलित किसान को खनन माफिया बताने की कोशिश की। यह साजिश न केवल सत्य को दबाने की थी, बल्कि दलित उत्पीड़न और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला थी। यह मामला केवल मारपीट या उगाही का नहीं, बल्कि दलित समुदाय के अधिकारों और सच्ची पत्रकारिता को कुचलने की सुनियोजित साजिश है। सवाल उठता है: क्या दलित की आवाज उठाना अपराध है? क्या सच के लिए लड़ने वाले पत्रकार को डराना और बदनाम करना अब सामान्य हो गया है?
#इस गिरोह के अन्य सदस्य फर्जी खबरें चलवाकर पत्रकार की छवि धूमिल कर रहे हैं, जिसकी शिकायत जल्द उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, क्यूंकि यह आपराधिक लोग हैं, जिससे सच उजागर करने वाले पत्रकार की हत्या, रोड एक्सीडेंट, अपहरण तक करवा सकते हैं, अगर ऐसा होता तो यह गिरोह ही करवा सकता है..#
पत्रकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:इस आपराधिक गिरोह के खिलाफ तत्काल SC/ST एक्ट, I.T. एक्ट और IPC की धाराओं में सख्त कार्रवाई हो। पीड़ित दलित किसान और निष्पक्ष पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। फर्जी खबरें फैलाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि दलितों के अधिकारों और सत्य की आवाज को दबाने की साजिशों के खिलाफ एकजुट होना होगा। प्रशासन से अपील है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर दंड दे, ताकि न कोई दलित भयभीत हो और न कोई सच्चा पत्रकार ब्लैकमेलिंग के आगे झुके।
रिपोर्ट: एलिक सिंह, संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़,
उत्तर प्रदेश महासचिव – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद,
संपर्क: 8217554083






