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दुमका हंसडीहा भागलपुर गोड्डा देवघर के मुख्य मार्ग कल से जाम लगा है और प्रशंसनीय व्यवस्था लाचार*

*जाम बना तीर्थ: कांवरियों की आस्था अब प्रशासनिक जाल में*

 

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दुमका-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर स्थित हंसडीहा के समीप निर्माणाधीन ओवरब्रिज के नीचे बने डायवर्सन ने एक बार फिर अपनी कुख्यात जाम-जादूगरी का प्रदर्शन किया है। बीते सोमवार को यहां एक वाहन के खराब हो जाने मात्र से पूरी सड़क जाम की गिरफ्त में आ गई। वाहन अभी तक ठीक नहीं हुआ है, किंतु यह रहस्य अभी भी बना हुआ है कि उसे वहां से हटाया गया या वह अब भी उसी स्थान पर विराजमान है। जिसके परिणामस्वरूप, दुमका-हंसडीहा मुख्य मार्ग ही नहीं, अपितु गोड्डा-देवघर मुख्य मार्ग भी पूरी तरह से प्रभावित हो गया। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें कुछ इस प्रकार लगीं है जिसे देख कर ऐसा प्रतीत होता है मानो सावन में कांवरियों की जगह अब गाड़ियाँ बाबा बासुकीनाथ के दर्शन को निकल पड़ी हों। सावन का यह पावन मास ऐसा है। जब श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम में जल अर्पित करने के बाद बाबा बासुकीनाथ धाम जल अर्पित करने के लिए आते थे। लेकिन प्रशासन ने उन कांवरियो को इस बार एक नया तीर्थ सौंप दिया है। जिसका नाम है जाम का तीर्थ। मिली जानकारी के अनुसार देवघर से बासुकीनाथ तक प्रस्तावित चार लेन सड़क का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। इसी कारण प्रशासन ने सभी कांवरियों को निर्देशित किया कि वे इस बार देवघर से हंसडीहा होते हुए बासुकीनाथ धाम बाबा को जल चढ़ाने के लिए जाएँ। किंतु यह वैकल्पिक मार्ग अब जाम रूपी संकट में फंस चुका है। भक्त तो जल लेकर बाबा को चढ़ाने के लिए चल पड़े हैं। लेकिन अब वे सड़कों पर वाहनों की रेंगती कतारों में फंसकर अपने सब्र का जल अर्पित करने को विवश हैं।
हर वर्ष सावन के अवसर पर भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के दावे किए जाते हैं। अधिकारीगण कर्तव्य निर्वहन की प्रशंसा स्वयं ही करते हैं, मानो कार्य की गति विश्व रिकॉर्ड की ओर अग्रसर हो।
किन्तु ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। वर्षों से पिचिंग की प्रतीक्षा कर रहा यह डायवर्सन आज भी ज्यों का त्यों है। बरसात आती है, सड़क डूबती है, और जाम की बाढ़ उमड़ पड़ती है। संबंधित विभागों का रवैया कुछ ऐसा है मानो वे ज़िम्मेदारी को ऐसे टालते हैं जैसे कोई बालक विद्यालय का होमवर्क भूलने का बहाना बनाता है। ऐसे में यह प्रश्न उठना भी लाज़मी है कि जब मार्ग में गड्ढे, जलभराव और जाम ही श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे, तो कांवरिया कैसे बाबा बासुकीनाथ धाम तक सकुशल पहुंचेंगे।
शायद प्रशासन को यह विश्वास है कि भक्तों का धैर्य अटूट है। वे हर-हर महादेव का जाप करते हुए जाम में भी मंज़िल पा लेंगे।

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