

📰 कानपुर के SHO संतोष शुक्ला पर गंभीर आरोप: हाईकोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज, बिल्डर संग मिलकर महिला का घर तोड़ कब्जा करने का मामला उजागर
कानपुर। जनपद कानपुर में पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि चकेरी थाने में तैनात SHO संतोष शुक्ला ने बिल्डर के साथ मिलकर एक महिला के घर की दीवार तोड़ दी और कब्जा करा दिया। हैरत की बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की मौजूदगी में हुआ। वहीं पीड़ित परिवार की शिकायत और साक्ष्यों को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और SHO समेत कई अन्य पर डकैती, जबरन घर में घुसकर तोड़फोड़ करने, लूटपाट और षड्यंत्र रचने जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज करने के आदेश दिए।
📌 मामला क्या है?
चकेरी थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया कि SHO संतोष शुक्ला ने स्थानीय बिल्डर और 40 अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उसके घर की दीवार तोड़ दी। घर में मौजूद लोगों से बदसलूकी की गई, मारपीट की गई और CCTV कैमरे तक तोड़ दिए गए। पीड़िता का आरोप है कि लाखों रुपये कैश और सोना भी लूट लिया गया।
📜 FIR से अंश
पीड़िता की तहरीर और हाईकोर्ट के आदेश पर चकेरी थाने में SHO संतोष शुक्ला, तत्कालीन चौकी इंचार्ज खटाना, एक बिल्डर और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई। FIR में लिखा गया है:
“अभियुक्तगण थाना अध्यक्ष संतोष शुक्ला, तत्कालीन चौकी इंचार्ज खटाना, सह अभियुक्त बिल्डर तथा लगभग 40 अज्ञात व्यक्तियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए वादी के मकान में अवैध रूप से प्रवेश किया, दीवार तोड़ी, घर में तोड़फोड़ की, नकद रुपए व गहने लूट लिए तथा विरोध करने पर मारपीट कर गंभीर चोटें पहुँचाईं।”
FIR में जिन धाराओं का जिक्र है, उनमें शामिल हैं:
धारा 395 (डकैती)
धारा 452 (गृह अतिक्रमण)
धारा 427 (तोड़फोड़)
धारा 323 (मारपीट)
धारा 504 (गाली-गलौज)
धारा 506 (धमकी)
धारा 120B (षड्यंत्र)।
⚖️ हाईकोर्ट का कड़ा रुख
हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने इस मामले पर बेहद सख्त टिप्पणी की। आदेश में कहा गया:
“न्यायालय यह देखकर स्तब्ध है कि थाना अध्यक्ष स्तर का अधिकारी बिल्डर के साथ मिलकर एक महिला के मकान में अवैध प्रवेश कर कब्ज़ा कराता है। यह कृत्य न केवल कानून व्यवस्था को कलंकित करता है बल्कि पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अतः न्यायालय आदेश देता है कि उक्त थाना अध्यक्ष व अन्य सभी अभियुक्तों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जाए तथा पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
🚨 SHO संतोष शुक्ला की छवि और विवाद
संतोष शुक्ला कानपुर पुलिस के भीतर “कप्तान और कमिश्नर के सबसे प्रिय SHO” कहे जाते रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वे हमेशा ‘चेतक’ की तरह काम करते और पत्रकारों को जेल भिजवाने में सबसे आगे रहते थे। उनके खिलाफ यह पहला विवाद नहीं है, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR ने उनकी छवि पर गंभीर धब्बा लगा दिया है।
🕵️ इन्वेस्टिगेटिव एंगल
जांच में सामने आया है कि बिल्डर और SHO के बीच गहरी साठगांठ थी। मकान कब्जाने की योजना पहले से बनाई गई थी। SHO के मौखिक आदेश पर पुलिसकर्मी भी चुप्पी साधे रहे। जानकार बताते हैं कि अक्सर “मौखिक आदेश” के नाम पर SHO अपने कप्तान/कमिश्नर का हवाला देकर कार्रवाई करते हैं, लेकिन जब मामले अदालत तक पहुँचते हैं, तो वही आदेश उन्हें बचा नहीं पाते।
❓ प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक SHO की करतूत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलता है। सवाल यह उठता है कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों की शह के बिना SHO इतना बड़ा कदम उठा सकते हैं? और अगर नहीं, तो इस मामले में जिम्मेदारी सिर्फ SHO तक ही सीमित क्यों की जा रही है?
📌 रिपोर्ट : एलिक सिंह
✍️ संपादक — समृद्ध भारत समाचार पत्र / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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