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1948 का ‘झंडा अपमान’ विवाद: राष्ट्रीय ध्वज फाड़ने के आरोप में RSS के सदस्यों पर FIR, गृह मंत्रालय ने दी थी गहन जाँच के निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में मौजूद दो गोपनीय दस्तावेज़ (दिनांक 24 फरवरी 1948) इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमृतसर के नागरिक श्री नागरमल घोरीवाला ने RSS

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1948 का ‘झंडा अपमान’ विवाद: राष्ट्रीय ध्वज फाड़ने के आरोप में RSS के सदस्यों पर FIR, गृह मंत्रालय ने दी थी गहन जाँच के निर्देश

विशेष रिपोर्ट:

आज़ादी के तुरंत बाद, 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान से जुड़ा एक गंभीर विवाद सामने आया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में मौजूद दो गोपनीय दस्तावेज़ (दिनांक 24 फरवरी 1948) इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमृतसर के नागरिक श्री नागरमल घोरीवाला ने RSS के सदस्यों द्वारा तिरंगे को फाड़ने और अपमानित करने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद भारत सरकार ने मामले की त्वरित और गहन जाँच के निर्देश दिए थे।

घटना 26 जनवरी 1948 को घटित हुई थी। अमृतसर के कपड़ा निर्माता नागरमल घोरीवाला ने शिकायत (F.R.) दर्ज कराई कि जब आम जनता भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहरा रही थी, RSS के सदस्यों ने इन झंडों को “जबरन हटाया, फाड़ा और पैरों से रौंदा”। घोरीवाला ने शिकायत में कहा कि अगर ऐसी गुंडागर्दी को फैलने दिया गया, तो यह सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज भी भेजा, जिसे उन्हें अनाज के ढेर में पड़ा मिला था।

गृह मंत्रालय ने 24 फरवरी 1948 को जारी पहले गोपनीय नोट में यह स्पष्ट किया कि यह शिकायत अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे पूर्वी पंजाब सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाए। नोट में निर्देश दिए गए कि “प्रत्येक शिकायत का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध रूप से किया जाए।”

दूसरे गोपनीय दस्तावेज़ में मंत्रालय ने इसे पूर्वी पंजाब के मुख्य सचिव, जालंधर को भेजते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की तत्काल जाँच (enquiry) की जाए और परिणाम जल्द से जल्द गृह मंत्रालय को सूचित किया जाए। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि RSS के सदस्यों ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। इसके साथ ही फटा हुआ ध्वज जाँच के लिए संलग्न किया गया था।

यह घटना उस समय की राजनीतिक संवेदनशीलता को उजागर करती है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद 4 फरवरी 1948 को सरकार ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया था। 24 फरवरी का यह दस्तावेज़ उस समय का है जब RSS पर प्रतिबंध प्रभावी था। इस संदर्भ में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला न केवल एक आपराधिक मामला था, बल्कि सरकार के लिए संगठन की गतिविधियों और विचारधारा पर सवाल उठाने का भी एक गंभीर आधार बन गया था।

इतिहास में यह घटना यह दर्शाती है कि स्वतंत्र भारत अपनी नई पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा की रक्षा के प्रति बेहद संवेदनशील था। गृह मंत्रालय द्वारा RSS के सदस्यों के खिलाफ यह औपचारिक कार्रवाई नई सरकार की संकल्पशीलता को दर्शाती है। यह दस्तावेज़ अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और 1948 के ‘झंडा अपमान’ विवाद पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दृष्टि प्रदान करता है।

यह विशेष रिपोर्ट न केवल ऐतिहासिक घटनाक्रम को रेखांकित करती है, बल्कि स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक वर्षों में सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की गंभीरता को भी उजागर करती है।


✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📞 8217554083

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