

++++++ नागपुर शनिवार 04 अक्टूबर 2025 ++++++
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन ने मध्यप्रदेश में कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत की खबरों के बाद देश के छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक दवाएं निर्माण करने वाली कंपनियों के प्लांट में तीन अक्टूबर से जांच अभियान शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी भी जारी करते हुए कहा कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को सर्दी खांसी की दवाएं कफ सिरप नहीं दी जाये। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से हुए 11 बच्चों की मौत की खबरे आने के बाद यह एडवायजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आने वाले डीजीएचएस ने अपने एडवाइजरी में कहा आमतौर पर पांच वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े आयु के बच्चों को यदि कफ सिरप दिया भी जाता है तो उसका सावधानीपूर्वक उपयोग किया जाना चाहिए। जिस बच्चे को यह दवा दी जा रही है उसे कड़ी निगरानी मे रखा जाना चाहिए। बच्चों को कफ सिरप की उचित मात्रा ही देनी चाहिए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नही देना चाहिए। प्राप्त जानकारी अनुसार मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी के फेल हो जाने से सात बच्चों की मौत भी हो चुकी है। जानकारी के अनुसार सातवें बच्चे ने नागपुर मे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। ऐसे लक्षण जिनसे सावधान रहें-: कफ सिरप लेने के बाद पहले एक दो दिन में मितली, उल्टी होना, कमजोर लगना, दस्त होना या पेट मे दर्द आदि । बच्चों को कफ सिरप देने के दो से छह दिन मे यदि मूत्र का कम आना या बंद हो जाना, चेहरे पर शरीर मे सूजन का आना, स्वांस लेने मे परेशानी होना। एक सप्ताह से दो सप्ताह के बीच- हाथ पैरों में कमजोरी या , लकवा , बोलने में या निगलने में परेशानी होना, चेहरा टेढ़ा हो जाना ।। ऐसे समय पर इलाज के लिए शीघ्र चिकित्सालय मे जाना चाहिए देरी नही करना चाहिए। घरेलू उपायों या बिना किसी प्रकार जांच के दवा का सेवन नही करना चाहिए। किसी भी प्रकार के संदिग्ध सिरप का उपयोग न करें। चिकित्सक की सलाह के बगैर बच्चों को सर्दी खांसी की दवाएं न दें। छह साल से कम आयु के बच्चों के खांसी के लिए सिरप का उपयोग न करें।











