
दीपक सिंह पटेल / सोनभद्र
आज पूरे देश में देवउठनी एकादशी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है.और यह व्रत सोनभद्र के कई जगहों बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें ज्यादातर कन्याएं पूजा पाठ करती नजर आई। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी से योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद इसी दिन जागते हैं. इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जिसके दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते. जब भगवान विष्णु अपनी निद्रा से जागते हैं, तब से सभी मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है. इसी कारण देवउठनी एकादशी का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है.
देवउठनी एकादशी पर चढ़ाई जाने वाली 7 मौसमी चीजें और उनका महत्व
1. बैंगन (Brinjal)
गन्ना इस दिन विशेष रूप से चढ़ाया जाता है. इसे पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. भगवान विष्णु को गन्ना अर्पित करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है. गन्ना पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है.
2. बेर (Ber)
बेर भगवान को प्रिय फल माना गया है. इसे चढ़ाने से जीवन में मिठास आती है. इतना ही नहीं यह विटामिन C से भरपूर होता है, जो त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभदायक है.
3. चने की भाजी (Chana Bhaji)
यह हरी सब्जी समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक है. इसमें आयरन और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन और रक्त निर्माण के लिए आवश्यक है. यह हरी सब्जी स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है। इसे देवउठनी के भोग में शामिल करना शुभ माना जाता है.
4. आंवला (Amla)
आंवला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसे अमृतफल कहा गया है. यह शरीर में विटामिन C की मात्रा बढ़ाता है, बालों, त्वचा और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है.
5. सिंघाड़ा (Water Chestnut)
सिंघाड़ा जल तत्व का प्रतीक है और इसे भोग में विशेष स्थान दिया गया है. यह शरीर को ठंडक देता है और इसमें कैल्शियम व आयरन होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं.
6. शकरकंद और आलूबुखारा (Sweet Potato & Plum)
दोनों ही शरीर को ऊर्जा और फाइबर प्रदान करते हैं. शकरकंद में विटामिन A होता है जो आंखों के लिए फायदेमंद है, जबकि आलूबुखारा पाचन क्रिया सुधारता है.
7. बैंगन (Brinjal)
बारिश के समय में बैगन को खाने की सलाह नहीं डी जाती है क्यूंकी किटाणुओं का खतरा होता है. देवउठनी के भोग में बैंगन को शामिल करने का विशेष महत्व है. इस दिन से कई लोग बैगन खाना शुरू कर देते है. यह शरीर में आयरन और फाइबर की पूर्ति करता है और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक है.












