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कलेक्टर अनिल राणावासिया की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक, पशुपालकों के पलायन को रोकने के लिए बनेगा ‘घास ग्रिड’

कच्छ में सूखे के संकट को लेकर प्रशासन अलर्ट:

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रिपोर्ट। धरकास मोखा। गुजरात

भुज:

कच्छ जिले में चालू मानसून सीजन के दौरान अब तक पर्याप्त बारिश न होने के कारण आगामी दिनों में चारे की भारी किल्लत होने की आशंका गहरा गई है। इस संभावित संकट से निपटने और समय रहते पुख्ता इंतजाम करने के उद्देश्य से कच्छ जिला कलेक्टर अनिल राणावासिया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि सूखे की स्थिति बनती है, तो मालधारी (पशुपालकों) को अपने मवेशियों के साथ दूसरे जिलों में पलायन न करना पड़े और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही चारा मिल सके।

कलेक्टर अनिल राणावासिया ने बैठक में जिले के सभी घास गोदामों में उपलब्ध स्टॉक की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पिछले वर्षों के सूखे के दौरान अपनाए गए चारा वितरण मॉडल का भी अध्ययन किया। अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि संभावित कमी को देखते हुए गांवों के क्लस्टर बनाए जाएं और हर क्लस्टर स्तर पर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों और बड़ी संख्या में पशुधन वाले इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए ताकि संकट के समय जरूरतमंदों तक राहत दर पर तुरंत चारा पहुंचाया जा सके।

बैठक में राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार पशुपालकों को जारी किए जाने वाले ‘घास कार्ड’ (Fodder Cards) की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में जिला विकास अधिकारी (DDO) उत्सव गौतम, निवासी अतिरिक्त कलेक्टर पार्थ कोटड़िया, आरटीओ अनिल गोस्वामी, उप वन संरक्षक (पश्चिम कच्छ) हर्ष ठाकर, उप वन संरक्षक (बन्नी) नेविल चौधरी, जिला पशुपालन अधिकारी आर.डी. पटेल और पुलिस उपाधीक्षक विश्वा शाह सहित पीजीवीसीएल और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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