

भिलाई। सुप्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने भगवान जगन्नाथ की दुनिया में सबसे छोटी मूर्ति का निर्माण किया है। उन्होंने उंगली के छोटे से नाखून के आकार की भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा देवी सुभद्रा की मूर्ति बनाई है। रथयात्रा के अवसर पर इन्हें समर्पित करते हुए छत्तीसगढ़ को माओवाद से मुक्त करने के लिए प्रभु को धन्यवाद दिया है, साथ ही देश में अच्छी वर्षा की कामना भी की है। यह मूर्तियां आधे सेन्टीमीटर छोटी है। उनकी इस उपलब्धि पर अंचल के कलाकारों एवं समग्र देवांगन समाज में हर्ष है। देवांगन समाज के वरिष्ठ एवं छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने इस गौरवशाली उपलब्धि के लिए मूर्तिकार डॉ अंकुश देवांगन को बधाई दी है।

अंकुश देवांगन 1985 से छोटी मूर्तियां तथा चांवल के छोटे-छोटे दानों पर चित्रों का निर्माण करते आ रहे हैं। जिसकी प्रदर्शनी वे बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विगत 36 वर्षों से कर रहे हैं। ताकि बच्चों में सृजनशीलता का विकास हो और वे हिंसा के रास्ते में न जाएं। जिसका सदैव ही उचित प्रतिफल प्राप्त हुआ है। उनकी कला को देखने गांवों में त्यौहार सा माहौल बन जाता है। बहरहाल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के सिलसिले में बनाए गए इस सूक्ष्मतम मूर्तियों में उनकी भाव- भंगिमाएं स्पष्ट दृष्टि गोचर हो रही है। इन मूर्तियों का निर्माण वे संगमरमर पत्थर को तराशकर करते हैं। वर्तमान में वे भिलाई इस्पात संयंत्र के मेडिकल विभाग में कार्यरत हैं।

वे छत्तीसगढ़ के प्रथम कलाकार हैं जिन्हें भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय ने ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की मानद सदस्यता दी है। जहां वे इसके बोर्ड मेंबर हैं। उन्होंने भिलाई, दल्लीराजहरा आदि सहित देश के अनेक शहरों में विशालकाय मूर्तियों का भी निर्माण कर खूब यश कीर्ति अर्जित किया है। उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं और देवांगन समाज सहित अनेक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।













