
बस्ती कृषि विभाग में तबादलों का ‘खेल’: नियम ताक पर, सौदेबाजी के आरोप
'मंत्री जी' बताइए, 'एसटी वर्मा' से कितने में हुआ तबादले का सौदा? तबादला संशोधन में बड़ा फर्जीवाड़ा: लखनऊ में तैनाती के लिए रची गई साजिश
अजीत मिश्रा (खोजी)
‘सौदेबाजी’ के खेल में फंसा कृषि विभाग: नियम ताक पर रखकर तबादला संशोधन करने का गंभीर आरोप
- तबादला संशोधन या ‘मोटा लिफाफा’?: कृषि विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
- नियमों की बलि देकर एसटी वर्मा का तबादला निरस्त, भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर
- बस्ती से लखनऊ तक: क्या पद के दुरुपयोग से चल रहा है अवैध कारोबार?
बस्ती: बस्ती जिले के कृषि विभाग में एक विवादित तबादला संशोधन ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि एसटी (ST) दीप नारायण वर्मा के तबादले को मनमाने ढंग से संशोधित किया गया है, जिसके पीछे कथित ‘आर्थिक सौदा’ होने की चर्चा आम है।
नियमों की अनदेखी और ‘विशेषाधिकार’ का खेल
खबर के अनुसार, केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाले नौ जिलों—श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, भदोही, चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र और फतेहपुर—में तैनात किसी भी कर्मचारी का तबादला रोकने या संशोधित करने का कोई नियम नहीं है। इन जिलों में तीन साल की सेवा अनिवार्य है और केवल विशेष परिस्थितियों में ही मुख्यमंत्री की मंजूरी से संशोधन संभव है।
हालाँकि, बस्ती से श्रावस्ती भेजे गए दीप नारायण वर्मा का तबादला जिस तत्परता से संशोधित किया गया, वह विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। आलोचकों का तर्क है कि बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के, किसी बड़े लेनदेन (मोटा लिफाफा) के बिना यह संशोधन होना नामुमकिन था।
संरक्षण और व्यक्तिगत हित का एजेंडा
इस मामले में केवल विभागीय तबादला ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए पद के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है:
- भाई की खाद दुकान का दबाव: आरोप है कि दीप नारायण वर्मा के भाई की भानपुर में खाद की दुकान है, जहाँ विभागीय अधिकारियों के रसूख का इस्तेमाल कर होलसेलर्स पर अधिक खाद देने और उधार देने का दबाव बनाया जाता है।
- पूर्व अधिकारियों का वरदहस्त: दीप नारायण वर्मा को जेडीए (JDA) और पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. राजमंगल चौधरी का करीबी माना जाता है, जिनकी मदद से उसने लखनऊ मुख्यालय में पोस्टिंग सुनिश्चित करवाई।
- अवैध कारोबार का संचालन: मुख्यालय में तैनाती का मुख्य उद्देश्य बस्ती में अपने और अपने भाई के वैध-अवैध कारोबार को सुरक्षित तरीके से संचालित करना बताया जा रहा है, ताकि कोई यह न देख सके कि कौन सा कर्मचारी कहाँ तैनात है।
- मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में धांधली: वर्मा के भाई बालमुकुंद की पत्नी रीना चौधरी के नाम पर ‘रामा ट्रेडर्स’ संचालित है। आरोप है कि वे मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में प्रतिवर्ष होने वाले लाखों के रसायनों की खरीद में धांधली करते हैं और आउटसोर्सिंग ऑपरेटर के रूप में काम करते हुए भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं।
विभागीय चुप्पी पर सवाल
कोई भी अधिकारी या कर्मचारी श्रावस्ती जैसे जिलों में जाना नहीं चाहता, क्योंकि वहाँ काम का बोझ अधिक है। वहीं, बस्ती में जमे रहने के लिए रचे गए इस पूरे ‘तंत्र’ ने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। यदि वर्मा का यह तबादला निरस्त नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि विभाग में नियमों से ऊपर ‘सौदेबाजी’ हावी है।
- प्रमुख आरोप: लेख में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और निदेशक पंकज त्रिपाठी पर ‘दीप नारायण वर्मा’ नामक एसटी (ST) के तबादले को संशोधित करने के बदले ‘सौदा’ करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
- नियमों का उल्लंघन: लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाले जिलों (जैसे श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच आदि) में तबादले को रोकने या संशोधित करने का कोई नियम नहीं है। बावजूद इसके, वर्मा जी का तबादला बस्ती से श्रावस्ती होने के बाद उसे संशोधित कर दिया गया, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- भाई और भ्रष्टाचार: आरोप है कि दीप नारायण वर्मा के भाई की भानपुर में खाद की दुकान है, जहाँ अधिकारियों के दबाव में होलसेलर्स से अवैध लाभ लिया जाता था। साथ ही, यह भी आरोप है कि वे अपने भाई और अपने अवैध कारोबार को चलाने के लिए लखनऊ मुख्यालय में पोस्टिंग सुनिश्चित करवाना चाहते थे।
- निष्कर्ष: लेख में यह तर्क दिया गया है कि बिना किसी मिलीभगत या ‘मोटा लिफाफा’ (रिश्वत) लिए बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना इस तरह का संशोधन संभव नहीं था।














