
बस्ती: राजस्व विभाग की पैमाइश को ठेंगा, दबंगों के आगे बेबस प्रशासन और पीड़ित परिवार!
बस्ती: पैमाइश के बावजूद पैतृक जमीन पर निर्माण कार्य बाधित, पीड़ित का आरोप। सरकारी पैमाइश को चुनौती, भू-माफियाओं के सामने नतमस्तक बहादुरपुर का प्रशासन? भूमि विवाद: राजस्व टीम ने की पुष्टि, फिर भी दबंगों के कब्जे में पीड़ित की पुश्तैनी जमीन।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: पैमाइश के बाद भी दबंगों का पैतृक भूमि पर कब्जा, प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखा रहे भू-माफिया
- कानून बनाम भू-माफिया: पैमाइश के बाद भी पीड़ित को अपनी ही जमीन पर निर्माण करने से रोका, प्रशासन खामोश।
- बेइली में भू-माफियाओं का बोलबाला: पैतृक जमीन पर कब्जे के लिए पीड़ित को जान से मारने की धमकी।
- राजस्व टीम की रिपोर्ट धरी की धरी, दबंगों की धमकियों से थमा विकास कार्य; जिलाधिकारी से न्याय की आस।
- क्या अब कागजों में ही सिमट कर रह गया है न्याय? पैमाइश के स्पष्ट आदेशों के बावजूद निर्माण कार्य पर ‘दबंग’ रोक।
बहादुरपुर (बस्ती): जिला प्रशासन द्वारा विधिवत पैमाइश किए जाने के बावजूद बहादुरपुर ब्लॉक के बेइली गांव में एक गरीब परिवार अपनी ही पैतृक भूमि पर निर्माण कार्य करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। आरोप है कि कुछ दबंग किस्म के लोग बैनामे की आड़ में पीड़ित की पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा जमाए बैठे हैं और निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बेइली में गाटा संख्या 842 पर महमूद हसन (निवासी दुल्हापार, संतकबीरनगर) और अब्दुल अलीम (निवासी अमिलहा, बस्ती) ने बैनामा कराया था। बाद में बस्ती-टांडा-अंबेडकर नगर रोड के चौड़ीकरण के दौरान इस भूमि का एक बड़ा हिस्सा NH-233 के दायरे में आ गया, जिसका मुआवजा भी संबंधित बैनामेदारों को प्राप्त हो चुका है। शेष बची महज 5.5 एयर भूमि भी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) की सीमा में ही आती है।
राजस्व टीम की पैमाइश में खुल गई पोल
विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों की सहमति और ग्राम प्रधान व ग्रामीणों की उपस्थिति में बीते 5 जुलाई 2026 को राजस्व टीम द्वारा गाटा संख्या 841/0.541 हे. और 842/0.017 हे. की पैमाइश की गई। हल्का लेखपाल सरिता वर्मा ने स्पष्ट किया कि पैमाइश के दौरान यह साफ हो गया है कि बैनामेदारों की शेष भूमि सड़क की सीमा में है, जबकि हैदर अली द्वारा किया जा रहा निर्माण कार्य उसकी वैध पैतृक भूमि पर हो रहा है।
दबंगों के आगे प्रशासन बेबस?
लेखपाल की रिपोर्ट और पैमाइश के स्पष्ट नतीजों के बाद भी हैदर अली को निर्माण करने से रोका जा रहा है। पीड़ित हैदर अली का आरोप है कि महमूद हसन और अब्दुल अलीम न केवल उनके काम में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि मना करने पर जान से मारने की धमकियां भी दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब विपक्षी द्वारा जिलाधिकारी के कार्यालय में फर्जी शिकायतें देकर अधिकारियों को गुमराह किया जाने लगा।
प्रधान पर भी दबंगों की नजर
इस मामले में ग्राम प्रधान शेर मोहम्मद ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी पक्ष पूरी तरह से भू-माफिया की तरह व्यवहार कर रहा है। प्रधान ने आरोप लगाया कि सही बात का समर्थन करने पर उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई है, जो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
पीड़ित की न्याय की गुहार
पीड़ित हैदर अली का कहना है कि प्रशासन के सामने सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद दबंगों के दबाव में आकर उनके निर्माण कार्य को रुकवाया जा रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी पैतृक भूमि पर निर्माण कार्य के लिए उचित सुरक्षा प्रदान की जाए।
क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि जब राजस्व विभाग की पैमाइश में सब कुछ स्पष्ट हो चुका है, तो फिर किन कारणों से स्थानीय स्तर पर प्रशासन दबंगों के आगे मौन है? क्या गरीब हैदर अली को उसकी अपनी जमीन पर मकान बनाने का हक नहीं है?



















