
वर्दी के नाम पर कलंक: बखिरा थाने के सिपाहियों ने की बर्बरता की हदें पार, पीड़ित को पिलाया पेशाब!
खाकी हुई शर्मसार: रक्षक ही बने भक्षक, बखिरा पुलिस पर अमानवीय प्रताड़ना का गंभीर आरोप। दरोगाओं का 'जंगलराज'? पुलिस पर लगा युवक को पीटने और पेशाब पिलाने का घिनौना आरोप।
अजीत मिश्रा (खोजी)
वर्दी पर कालिख: रक्षक ही बने भक्षक, बखिरा थाने के सिपाहियों पर अमानवीय प्रताड़ना का आरोप
- संत कबीर नगर: क्या पुलिस थाने हैं या टॉर्चर रूम? पुलिसकर्मियों की क्रूरता से दहला भटौली गांव।
- जनता की सुरक्षा या हैवानियत का अड्डा? बखिरा पुलिस का घिनौना चेहरा आया सामने।
- ‘रक्षक’ बने ‘भक्षक’: बेलहर के युवक की दास्तां सुनकर कांप जाएगी रूह।
संत कबीर नगर: जनपद में कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के बखिरा थाने में तैनात पुलिसकर्मियों पर एक ग्रामीण को बेरहमी से पीटने और उसके साथ ऐसी अमानवीय हरकत करने का आरोप लगा है, जिसे सुनकर किसी भी सभ्य समाज की रूह कांप जाए। बेलहर थाना क्षेत्र के भटौली गांव निवासी अरविंद कुमार ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अरविंद कुमार का आरोप है कि बखिरा थाने में तैनात सिपाही संजीव यादव, नंदलाल यादव और एक अन्य अज्ञात सिपाही ने उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया। आरोप केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित ने यह दावा किया है कि पुलिसकर्मियों ने उसे पेशाब पिलाने जैसी घिनौनी और अमानवीय हरकत को अंजाम दिया। यह कृत्य पुलिस की छवि को धूमिल करने के साथ-साथ संविधान और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
रक्षक या दरिंदे?
सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस को इसलिए भर्ती किया गया है कि वे आम जनता के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार करें? जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाए? बखिरा पुलिस की यह करतूत न केवल विभाग पर एक बड़ा धब्बा है, बल्कि जिले के आला अधिकारियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
क्या प्रशासन करेगा कार्रवाई?
घटना के बाद से क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर न्याय की मांग की है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन आरोपी पुलिसकर्मियों पर निष्पक्ष जांच होगी? अक्सर ऐसे मामलों में विभागीय लीपापोती की आशंका बनी रहती है, जिससे जनता का पुलिस के प्रति भरोसा कम होता है।
अब समय आ गया है कि पुलिस विभाग अपनी वर्दी की गरिमा बचाने के लिए ऐसे दागदार तत्वों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करे। यदि इन आरोपियों को निलंबित कर इनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह खाकी वर्दी के प्रति आमजन के विश्वास को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
जनता अब केवल जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा देखना चाहती है।





















