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कांटे जैसी चुभन और खिचखिच होगी दूर: गले की खराश ठीक करने के 6 रामबाण देसी तरीके

मीना अग्रवाल

नेचुरोपैथी (Screenshot 2026 07 09 16 04 53 095 com.android.chrome edit IMG 20260709 WA0236आगरा)

क्या मौसम बदलते ही आपके गले में दर्द, सुई जैसी चुभन या थूक निगलने में भी भयंकर तकलीफ होने लगती है? गले की खराश, टॉन्सिल्स और सूखी खांसी एक ऐसी असुविधाजनक समस्या है जो रातों की नींद खराब कर देती है। लोग अक्सर इससे राहत पाने के लिए तुरंत एंटीबायोटिक दवाएं या कफ सिरप पीने लगते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देते हैं और पेट में गर्मी बढ़ाते हैं। गले में इन्फेक्शन और खराश का मुख्य कारण शरीर में ‘कफ और वात दोष’ का असंतुलन होना है।

 

अगर आप भी बिना किसी अंग्रेजी दवा के अपने गले के दर्द और सूजन को मिनटों में शांत करना चाहते हैं, तो इन 6 अचूक घरेलू उपायों को आजमाएं:

 

*गले की खराश और दर्द से तुरंत राहत पाने के 6 मुख्य उपाय:*

 

* नमक पानी: गरारे (गर्गल) करें**

* **यह क्यों जरूरी है:** गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करना गले के इन्फेक्शन को ठीक करने का सबसे पुराना और वैज्ञानिक तरीका है। नमक एक प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक की तरह काम करता है जो गले के टिश्यूज में जमा अतिरिक्त फ्लूइड और बैक्टीरिया को खींचकर सूजन को कम करता है। दिन में 2 से 3 बार गरारे जरूर करें।

 

* *शहद: अदरक के साथ चाटें**

* **यह क्यों जरूरी है:** शहद में अद्भुत हीलिंग और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जबकि अदरक प्राकृतिक रूप से सूजन को कम करता है। एक चम्मच शुद्ध शहद में आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर धीरे-धीरे चाटें। यह मिश्रण गले के अंदरूनी हिस्से पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है, जिससे सूखी खांसी और खिचखिच में तुरंत आराम मिलता है।

 

* *. लौंग: मुंह में रखें**

* **यह क्यों जरूरी है:** लौंग में ‘यूजेनॉल’ (Eugenol) नामक तत्व होता है, जो एक नेचुरल पेनकिलर और एंटी-सेप्टिक है。 गले में तेज दर्द या खांसी उठने पर 1 या 2 लौंग मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें。 इसका रस गले की नसों को शांत करता है और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकता है।

 

* * तुलसी: चाय बनाकर पिएं**

* **यह क्यों जरूरी है:** तुलसी को सबसे शक्तिशाली एंटी-वायरल और इम्युनिटी बूस्टर माना गया है。 पानी में 7-8 तुलसी की पत्तियां, थोड़ी सी काली मिर्च और मिश्री डालकर अच्छी तरह उबाल लें और इस हर्बल चाय का सेवन करें। यह फेफड़ों और श्वसन तंत्र में जमा कफ को पिघलाकर बाहर निकाल देती है।

 

* हल्दी: गुनगुने पानी में लें यह क्यों जरूरी है: हल्दी एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी औषधि हैं।रात को सोने से पहले आधा चम्मच हल्दी पाउडर को एक गिलास गुनगुने पानी या गर्म दूध में मिलाकर पिएं। यह गले के बैक्टीरिया का खात्मा करती है और रातभर में शरीर की रिकवरी को तेज करती है।*

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* *भाप: गर्म पानी से लें।* **यह क्यों जरूरी है:** सूखी हवा और बलगम के सूखने से गले की नसों में खिंचाव आता है, जिससे दर्द बढ़ता है। एक बर्तन में पानी गर्म करें और तौलिया ओढ़कर उसकी भाप (Steam) ले। भाप लेने से श्वास नली की ड्राईनेस खत्म होती है, जकड़न खुलती है और गले को तुरंत नमी व आराम मिलता हैं।

 

 

 

*सावधान: गले की खराश होने पर इन चीजों को हाथ भी न लगाएं!*

 

> **ठंडी और खट्टी चीजों से सख्त परहेज:** यदि आपके गले में इन्फेक्शन या दर्द है, तो फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और खट्टी चीजें (जैसे दही, नींबू, अचार) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें। ठंडी चीजें गले की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती हैं, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस हिस्से में कम हो जाती है और बैक्टीरिया या वायरस को फलने-फूलने का पूरा मौका मिल जाता है। हमेशा हल्का गुनगुना पानी ही पिएं।

 

 

*पेट को साफ और शरीर को स्वस्थ रखने का ‘3-स्टेप देसी नियम’:*

 

शरीर में कफ दोष का मुख्य कारण मंद पाचन तंत्र है। इसे ठीक रखने के लिए इन 3 नियमों का पालन करें:

 

**सुबह का उषापान:** सुबह सोकर उठते ही बिना कुल्ला किए बैठकर आराम से घूँट-घूँट करके 1 से 2 गिलास हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह पेट की पुरानी गंदगी को साफ करता है और शरीर के तापमान को संतुलित रखता है, जिससे बार-बार कफ बनने की समस्या नहीं होती।

 

*भोजन के तुरंत बाद पानी बंद:* खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना पूरी तरह बंद कर दें। यह आदत पाचक अग्नि को बुझा देती है, जिससे भोजन ठीक से पचने के बजाय सड़ता है और शरीर में विषाक्त तत्व (टॉक्सिन्स) बनाता है, जो आगे चलकर कफ और सर्दी-खांसी के रूप में बाहर निकलते हैं। हमेशा भोजन के 45 मिनट बाद ही पानी पिएं।

 

*बैठकर सिप-सिप पानी पीना:* खड़े होकर बोतल से पानी गटकने की आदत छोड़ें। पानी हमेशा आराम से बैठकर, सिप-सिप करके ही पिएं ताकि वह लार के साथ मिलकर पेट में जाए। इससे शरीर का नर्वस सिस्टम शांत रहता है और वात व कफ दोष पूरी तरह संतुलित रहते हैं।

 

 

 

गले की खराश या टॉन्सिल्स की समस्या के लिए हैवी एंटीबायोटिक्स खाने के बजाय प्रकृति के इन सरल उपायों को अपनाना ज्यादा सुरक्षित और असरदार है। नमक पानी के गरारे, शहद-अदरक का मिश्रण, लौंग चूसना, तुलसी की चाय, हल्दी वाला गुनगुना पानी और गर्म पानी की भाप—ये 6 आदतें आपके गले को 24 घंटे के भीतर पूरी तरह ठीक कर सकती हैं। बाहरी केमिकल्स को छोड़ें और इन सुरक्षित नियमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

 

 

क्या आप जानना चाहते हैं कि रोज़ रात को सोने से ठीक पहले अपने दोनों पैरों के अंगूठों में ‘शुद्ध सरसों के तेल’ की 2 मिनट मालिश करने से बिना ₹1 खर्च किए गले की सूजन और पुरानी से पुरानी सूखी खांसी मात्र 3 दिनों में कैसे गायब हो जाती है।

 

Health is wealth

 

मीना अग्रवाल

आगरा

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