
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, गुरूवार, 09 जुलाई 2026।
-: हलहारिणी अमावस्या प्रति वर्ष आषाढ मास की अमावस्या तिथी को मनाई जाती है, यह हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र तिथी मानी जाती है। हिंदू धार्मिक मान्यतानुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, दान पुण्य, जप तप, पितृ तर्पण, और भगवान विष्णुजी की पूजा आराधना करने पर जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। आषाड़ी हलहारिणी अमावस्या के दिन कई जगहों पर किसान भाई खेती किसानी से संबंधित औजारों की पूजा भी करतें हैं, इस दिन किसान भाई अपने बैलों और खेती के काम में उपयोग में लाई जाने वाले कृषी औजारों का विधि-विधान पूर्वक पूजन करतें हैं, और किसान भाई अपनी धरती माता के प्रति आभार प्रकट करते हुए अच्छी बारिश और समृद्ध फसल की कामना भी करते हैं। हिंदू धर्म में हर तिथी,वार का विशेष महत्व बतलाया गया है। आषाढ मास की अमावस्या तिथी का भी विशेष धार्मिक आध्यात्मिक महत्व बतलाया गया है। पंचांग के अनुसार इस बार आषाढ मास की अमावस्या तिथी का प्रारंभ 13 जुलाई दिन सोमवार को शाम के 06:49 बजे के लगभग हो रहा है, अमावस्या तिथी का समापन अगले दिन 14 जुलाई 2026 मंगलवार को दोपहर में 03:13 के लगभग होगाव ऐसी परिस्थिति में उदया तिथी के अनुसार आषाढ हलहारिणी अमावस्या 14 जुलाई मंगलवार मनाया जाना उचित है। ऐसी मान्यता है कि इसी समय से बारिश का मौसम भी अपनी गति पकड़ने लगता है,जिससे खेतों में किसान भाई जुताई बोवाई आदि भी करने लगतें हैं इसी कारण से यह आषाढ अमावस्या का महत्व भी बड़ जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार के अनुसार हलहारिणी अमावस्या के दिन नीम,पीपल, बरगद,बेलपत्र आंवले का पौधा लगाना भी अत्यंत शुभफलदायक माना जाता है। इन पौधों को विशेष रूप से सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाना चाहिए, जिससे पौधों के बड़े होकर वृक्ष बनने पर अधिक से अधिक लोगों तक इनका लाभ पहुंच सके। आषाढ हलहारिणी अमावस्या की यह पवित्र तिथी कृषी कार्यों से भी जुड़ी हुई है। हलहारीणी अमावस्या पर कुछ धार्मिक उपाय करना विशेष फलदायक माना जाता है। इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है,इस दिन मछलियां को आटे की गोलियां बनाकर खिलाने से जीवन मे आने वाली बाधाएं कम होती हैं।.मान्यतानुसार इस दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। इस दिन जरुरतमंद लोंगों को उनकी जरूरत की चींजे दान करना उत्तम होता है। ( यहां पर दी गई सभी जानकारी मान्यतायों पर आधारित है, हम किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते,पाठकगण कृपया किसी भी जानकारी मान्यता को अपनाने से पूर्व विषय विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त कर लें।











