
उत्तर प्रदेशबस्ती
दसिया (रुधौली) में एथेनॉल फैक्ट्री: विकास की आड़ में विनाश की दस्तक, लखीमपुर जैसी तबाही की ओर बढ़ रहा बस्ती!
एथेनॉल फैक्ट्री का 'अमृत' या रुधौली के पानी में 'जहर'? लखीमपुर के जुआरी प्लांट की बर्बादी से सहमे दसिया के ग्रामीण!रुधौली में रोज़गार का झांसा या बीमारी का न्योता? दसिया एथेनॉल प्लांट पर उठे गंभीर सवाल!
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: विकास की आड़ में विनाश का एथेनॉल मॉडल, लखीमपुर की तबाही से भी नहीं लिया सबक!
दसिया (रुधौली),
- ⚠️: विकास या विनाश? दसिया (रुधौली) में एथेनॉल प्लांट के खिलाफ जनता ने दागे तीखे सवाल!
- लखीमपुर में पानी बर्बाद, जनता बीमार; क्या अब रुधौली की बारी? जागिए बस्ती वासियों!
- नेताओं की जेबें गर्म, जनता के हिस्से आएगा चर्म रोग और दूषित पानी? दसिया एथेनॉल फैक्ट्री पर महा-रिपोर्ट!
बस्ती। रुधौली तहसील के दसिया में धड़ल्ले से आकार ले रही नई एथेनॉल फैक्ट्री आने वाले दिनों में क्षेत्र वासियों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी या जानलेवा, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बन गया है। उत्तर प्रदेश के ही लखीमपुर जिले से आ रही जुआरी इंडस्ट्रीज की भयावह तस्वीरें दसिया और पूरे रुधौली क्षेत्र के भविष्य को लेकर रोंगटे खड़े करने वाली हैं। लखीमपुर में महज कुछ सालों के भीतर एथेनॉल निर्माण ने पूरे क्षेत्र के पानी को ‘जहर’ बना दिया है, हवा में बारूद घोल दिया है और घर-घर में चर्म रोग (स्किन डिजीज) की महामारी बांट दी है। क्या दसिया (रुधौली) भी इसी विनाशकारी रास्ते पर आगे बढ़ रही है? [1]
लखीमपुर की हकीकत: आरओ बना मजबूरी, नेता हुए मूकदर्शक
लखीमपुर में जुआरी एथेनॉल प्लांट के महज 300 मीटर के दायरे में आने वाले गांवों का भूजल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। पानी अब पीने लायक नहीं बचा। जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे आरओ (RO) लगवा कर या पानी खरीदकर जान बचा रहे हैं। लेकिन गरीब जनता वही प्रदूषित, बदबूदार पानी पीने को मजबूर है। क्षेत्र में मक्खियों और मच्छरों का ऐसा तांडव है कि जीना मुहाल हो चुका है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि अरबों कमाने वाली इस कंपनी ने कॉर्पेोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत स्थानीय स्तर पर शुद्ध पानी के लिए एक आरओ प्लांट तक नहीं लगाया। आरोप है कि यहां का सीएसआर फंड दूसरे राज्यों की तिजोरियों में भेजा जा रहा है। वहीं, जनता के वोट पर ऐश करने वाले स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि पूरी तरह बिकाऊ, भ्रष्ट और निठल्ले साबित हुए हैं, जिन्हें जनता की सिसकियों से ज्यादा अपनी जेबें गर्म करने में दिलचस्पी है।
लखीमपुर में जुआरी एथेनॉल प्लांट के महज 300 मीटर के दायरे में आने वाले गांवों का भूजल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। पानी अब पीने लायक नहीं बचा। जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे आरओ (RO) लगवा कर या पानी खरीदकर जान बचा रहे हैं। लेकिन गरीब जनता वही प्रदूषित, बदबूदार पानी पीने को मजबूर है। क्षेत्र में मक्खियों और मच्छरों का ऐसा तांडव है कि जीना मुहाल हो चुका है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि अरबों कमाने वाली इस कंपनी ने कॉर्पेोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत स्थानीय स्तर पर शुद्ध पानी के लिए एक आरओ प्लांट तक नहीं लगाया। आरोप है कि यहां का सीएसआर फंड दूसरे राज्यों की तिजोरियों में भेजा जा रहा है। वहीं, जनता के वोट पर ऐश करने वाले स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि पूरी तरह बिकाऊ, भ्रष्ट और निठल्ले साबित हुए हैं, जिन्हें जनता की सिसकियों से ज्यादा अपनी जेबें गर्म करने में दिलचस्पी है।
ज़िला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीधे और तीखे सवाल:
लखीमपुर की इस भयावह स्थिति को देखते हुए दसिया (रुधौली) की जनता अब बस्ती के ज़िलाधिकारी (DM) और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की तरफ रुख कर रही है। क्षेत्र के सजग नागरिकों ने प्रशासन के बंद कमरों की खामोशी पर सीधे सवाल दागे हैं:
लखीमपुर की इस भयावह स्थिति को देखते हुए दसिया (रुधौली) की जनता अब बस्ती के ज़िलाधिकारी (DM) और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की तरफ रुख कर रही है। क्षेत्र के सजग नागरिकों ने प्रशासन के बंद कमरों की खामोशी पर सीधे सवाल दागे हैं:
- सवाल 1: क्या बस्ती ज़िला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दसिया (रुधौली) में इस नई एथेनॉल फैक्ट्री को ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) देने से पहले लखीमपुर जैसे ज़मीनी हालातों का अध्ययन किया है? या फिर कागज़ी कागज़ात चमकाकर एनओसी बांट दी गई?
- सवाल 2: प्रदूषण विभाग के पास इस बात की क्या गारंटी है कि दसिया में फैक्ट्री चालू होने के बाद यहाँ का भूजल और पर्यावरण दूषित नहीं होगा? क्या विभाग ने ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया है?
- सवाल 3: ज़िलाधिकारी महोदय, क्या प्रशासन इस कंपनी को मजबूर करेगा कि वह काम शुरू करने से पहले ही सीएसआर (CSR) फंड का एक बड़ा हिस्सा दसिया और रुधौली के प्रभावित होने वाले गांवों में शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च करे? या लखीमपुर की तरह यहाँ की गाढ़ी कमाई भी दूसरे राज्यों में उड़ाने की खुली छूट मिलेगी?
- सवाल 4: अगर आने वाले चंद सालों में दसिया (रुधौली) के गाँवों का पानी काला और हवा जहरीली हो गई, तो इसकी नैतिक और कानूनी ज़िम्मेदारी किसकी होगी—प्रदूषण विभाग की, ज़िला प्रशासन की या फिर एसी कमरों में बैठकर मौज काट रहे स्थानीय नेताओं की?
रुधौली पर मंडराया संकट: क्या यहाँ भी बहेगा प्रदूषण का जहर?
जनता पूछ रही है कि जब एथेनॉल फैक्ट्रियां पर्यावरण और मानव जीवन को इस कदर तबाह कर रही हैं, तो स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में क्यों सोया है? क्या बस्ती के नेता भी लखीमपुर के नेताओं की तरह रीढ़विहीन होकर तमाशा देखेंगे, या समय रहते इस आगामी विनाश के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएंगे? अगर आज दसिया और रुधौली की जनता और प्रशासन नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियां पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेंगी और अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर होंगी।
जनता पूछ रही है कि जब एथेनॉल फैक्ट्रियां पर्यावरण और मानव जीवन को इस कदर तबाह कर रही हैं, तो स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में क्यों सोया है? क्या बस्ती के नेता भी लखीमपुर के नेताओं की तरह रीढ़विहीन होकर तमाशा देखेंगे, या समय रहते इस आगामी विनाश के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएंगे? अगर आज दसिया और रुधौली की जनता और प्रशासन नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियां पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेंगी और अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर होंगी।




















