उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती सहकारी बैंक पर बड़ा संकट: 5 करोड़ से अधिक का बकाया और अधिकारियों की लापरवाही से दिवालिया होने की कगार पर बैंक

'एसी' कमरे से बाहर निकलें अधिकारी, वरना डूब जाएगा किसानों का पैसा: जिला सहकारी बैंक में गबन की आशंका; खाद घोटाले से लेकर करोड़ों की वसूली तक: फील्ड पर क्यों नहीं जा रहे सीडीसीओ, एआर और सचिव?

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में जिला सहकारी बैंक पर संकट: 5 करोड़ से अधिक का बकाया और अधिकारियों की लापरवाही से किसानों में आक्रोश

  • बस्ती सहकारी बैंक पर मंडराया संकट: लाखों के बकाये और खाद घोटाले पर अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें
  • सचिव अरुणेश पांडेय पर 21 लाख का बकाया: वसूली के लिए फील्ड में उतरने को मजबूर प्रशासन
  • ‘वसुली’ तभी होगी जब ‘सचिव’, ‘एआर’ और ‘सीडीसीओ’ फील्ड में जाएंगे, अन्यथा बैंक बैठ जाएगा

बस्ती। जिले में जिला सहकारी बैंक और संबंधित सहकारी समितियों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बैंक के ऋण का एक बड़ा हिस्सा समितियों में फंस गया है, जिससे जिले की बैंकिंग व्यवस्था के दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है। खाद की उपलब्धता और करोड़ों रुपये की वसूली को लेकर अधिकारियों की उदासीन कार्यशैली किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।

एसी कमरों में कैद अधिकारी और धरातल पर शून्य परिणाम

​शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि सहायक निबंधक (एआर), सीडीसीओ और सचिव फील्ड में जाकर किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान करें, लेकिन ये अधिकारी कार्यालयों के एसी कमरों तक ही सीमित हैं।शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एआर, सीडीसीओ और सचिव फील्ड में जाकर किसानों की समस्याओं का निस्तारण करें, लेकिन ये अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। आरोप है कि सीडीसीओ और एआर का ध्यान केवल समितियों पर खाद पहुँचाने तक सीमित है, लेकिन खाद वास्तविक रूप से कहाँ जा रही है, इसकी मॉनिटरिंग में भारी लापरवाही बरती जा रही है।

  • ​सीडीसीओ और एआर का ध्यान केवल समितियों पर खाद पहुँचाने तक केंद्रित है, लेकिन वे यह जानने का प्रयास नहीं कर रहे हैं कि खाद वास्तव में किसानों तक पहुँच रही है या नहीं।
  • ​यदि खाद समितियों पर उपलब्ध नहीं है और पैसा भी गायब है, तो सवाल उठता है कि अधिकारी क्या कार्य कर रहे हैं।
  • ​यह भी आरोप है कि इन अधिकारियों ने फील्ड में न निकलने की मानों कसम खा रखी है।

वित्तीय अनियमितता और गबन के संकेत

​4 जुलाई 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, जिले की 116 समितियों पर कुल 5 करोड़ 35 लाख रुपये का भारी बकाया है।

  • सचिवों पर आरोप: कई सचिवों पर लाखों रुपये के बकाये का मामला सामने आया है। इसमें लालगंज, बानपुर और सिकंदरपुर समिति के सचिव अरुणेश पांडेय पर सबसे अधिक 21 लाख 16 हजार रुपये का बकाया बताया गया है।
  • गबन की आशंका: रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समितियों के पास न तो खाद है और न ही पैसा, तो यह सीधे तौर पर गबन का मामला है। फिर भी अभी तक किसी भी सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
  • आरटीजीएस का दुरुपयोग: बैंक के नुकसान के बावजूद आरटीजीएस के माध्यम से लेनदेन जारी है, जिस पर रोक लगाकर जांच करने की सख्त आवश्यकता जताई गई है।

क्या है समाधान?

​खबर में प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग की गई है:

  • ​अधिकारियों को एसी कमरों से बाहर निकलकर समितियों का औचक निरीक्षण करना होगा।
  • ​जिन समितियों पर खाद और पैसा दोनों गायब हैं, उन सचिवों पर गबन का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
  • ​सीडीसीओ और एआर को मिलकर जिम्मेदारी उठानी होगी ताकि खाद किसानों तक पहुँचे और बैंक का पैसा सुरक्षित वापस आ सके।

​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिकारी अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं लाते, तो जिला सहकारी बैंक की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है, जिसका सीधा खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ेगा।

जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की गई है कि वे तत्काल प्रभाव से फील्ड में उतरें। यदि ऋण की वसूली नहीं होती है, तो संबंधित सचिवों पर गबन के मुकदमे दर्ज किए जाएं और आरटीजीएस प्रणाली की सघन जांच हो ताकि बैंक को दिवालिया होने से बचाया जा सके।

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