उत्तर प्रदेशबस्ती

पीडब्ल्यूडी का ‘टेंडर बाबू’ खुद अपनी साजिश में फँसा, शुरू हुई जांच

प्रेमचंद्र को हटाने की साजिश पड़ी भारी: 'पट्टू' बाबू के खिलाफ खुला पोल-खोल; बस्ती पीडब्ल्यूडी: दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले 'पट्टू' पर खुद गिरी गाज

​’पट्टू’ ने जो गढ़ा ‘प्रेमचंद्र’ के लिए ‘खोदा’, उसमें वह ‘खुद’ गिर गए

बस्ती: कहावत है कि “दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला खुद उसमें गिरता है” और “जिनके घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।” बस्ती के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यालय में हुई एक हालिया घटना ने इन दोनों कहावतों को बिल्कुल सटीक साबित कर दिया है। पिछले 16 वर्षों से विभाग के टेंडर बाबू के पद पर तैनात प्रभात कुमार उर्फ ‘पट्टू’ द्वारा रची गई एक साजिश अंततः उन्हीं पर भारी पड़ गई है।

​साजिश की पटकथा

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभात कुमार उर्फ ‘पट्टू’ ने एक स्थानीय नेता के साथ मिलकर पीडब्ल्यूडी के प्रशासनिक अधिकारी प्रेमचंद्र को उनके पद से हटाने की सुनियोजित साजिश रची थी। इस मुहिम में टेंडर संघ के प्रदेश सचिव संजय सिंह पगार भी उनके साथ शामिल थे। पगार ने प्रेमचंद्र पर एक ही जिले में 27 साल तक रहने और अकूत संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप लगाया था।

​साजिश के पीछे की असली वजह

​इस शिकायत के पीछे का मुख्य कारण प्रेमचंद्र के कारण टेंडर संघ का टेंडर निरस्त होना बताया जा रहा है, जिससे संघ को लाखों का नुकसान हुआ था। इसके साथ ही, पट्टू को यह मलाल था कि प्रेमचंद्र के कारण उनका ‘मलाईदार’ पद छिन गया है। इन कारणों से पट्टू और संजय सिंह पगार ने मिलकर प्रेमचंद्र को निशाना बनाया।

​जांच का उलटफेर

​संजय सिंह पगार की शिकायत पर दबाव में आकर मुख्य अभियंता ने शासन को प्रेमचंद्र के तबादले के लिए पत्र लिखा। हालांकि, शासन ने जब रिकॉर्ड की जांच की, तो पाया कि प्रेमचंद्र का तबादला गोरखपुर से बस्ती हुए अभी मात्र एक साल ही हुआ था, न कि 27 साल। इसके बाद जब प्रेमचंद्र के खिलाफ आरोपों की विस्तृत जांच हुई, तो वे सभी निराधार पाए गए और उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।इसके विपरीत, जब प्रेमचंद्र के खिलाफ आरोपों की जांच हुई, तो वे सभी निराधार पाए गए और उन्हें बरी कर दिया गया। अब पासा पूरी तरह पलट चुका है। पट्टू के खिलाफ विभाग ने जांच शुरू कर दी है और उन्हें लखनऊ तलब किया गया था।

​पट्टू की बढ़ती मुश्किलें

​अब पासा पूरी तरह पलट चुका है। प्रेमचंद्र के खिलाफ रची गई साजिश के साक्ष्य सामने आने के बाद, अब विभाग ने पट्टू बाबू के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। पट्टू पर कई गंभीर आरोप लगे हैं:

  • ​उनके भाई का ठेकेदारी में पंजीकरण होना।
  • ​उनकी पत्नी के नाम दो स्थानों पर करोड़ों की जमीन खरीदना और उसे मानव संपदा पोर्टल पर प्रदर्शित न करना।
  • ​बिना सरकार की अनुमति के न्यूजीलैंड में रह रहे अपने बच्चों से मिलने जाना।

​फिलहाल, जहां प्रेमचंद्र इन सभी आरोपों से बरी हो गए हैं, वहीं पट्टू अब खुद अपनी ही रची गई साजिश के जाल में फंसते हुए नजर आ रहे हैं।

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