
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
गडचिरोली जिले में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने का दावा किए जाने के बीच एटापल्ली तालुका में रविवार को दो जगहों पर नक्सली आशय के बैनर और पर्चे मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खनन परियोजनाओं से जुड़ी 4 कंपनियों का विरोध करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को भी चेतावनी दी गई है। इससे इलाके में एक बार फिर नक्सली गतिविधियों की चर्चा तेज हो गई है।
कुंडम के पास मिले बैनर-पर्चे
एटापल्ली तालुका के पिपली बुर्गी उप-पुलिस स्टेशन क्षेत्र के कुंडम गांव के पास रविवार को दो अलग-अलग स्थानों पर नक्सली बैनर और पर्चे मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी बैनर व पर्चे जब्त कर लिए। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ सीमा से लगे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस ने सर्च अभियान शुरू किया है।
खान कंपनियों को काम बंद करने की धमकी
राज्य सरकार ने गडचिरोली को ‘स्टील हब’ के रूप में विकसित करने की नीति अपनाई है। इसके बाद जिले में कई खनन परियोजनाओं को गति मिली है। एटापल्ली क्षेत्र में भी लौह अयस्क भंडार की गुणवत्ता जांच और सर्वेक्षण चल रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में मिले पर्चों में ओमसाई, नेचुरल, सनफ्लावर और जेएसडब्ल्यू सहित 4 कंपनियों का नाम लेकर उनका काम तुरंत बंद करने का आह्वान किया गया है। साथ ही हेटलकसा-कुदरी-मोहरली क्षेत्र में चल रहे ड्रोन सर्वेक्षण का भी नक्सलियों ने कड़ा विरोध जताया है।
जल-जंगल-जमीन का हवाला, सरपंचों को धमकी
पर्चों में दावा किया गया है कि जल, जंगल और जमीन खतरे में है। स्थानीय नागरिकों को आंदोलन के लिए उकसाने की कोशिश की गई है। आरोप लगाया गया है कि खनन परियोजनाओं से आदिवासियों के अधिकार छीने जा रहे हैं और भविष्य में स्थानीय युवाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
पर्चों में उन सरपंचों, पटेलों और ग्रामीणों को भी गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है जो संबंधित कंपनियों को सहयोग करेंगे।
पुलिस कर रही जांच
हाल के दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नक्सलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगने का दावा किया जा रहा था। ऐसे में फिर से बैनर-पर्चे मिलने से पुलिस अलर्ट हो गई है। पुलिस ने जब्त किए गए बैनर और पर्चों की जांच शुरू कर दी है और इसके पीछे कौन हैं, इसका पता लगाया जा रहा है।
इस संबंध में गडचिरोली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने कहा, “पिपली बुर्गी क्षेत्र में मिले बैनर और पर्चों की जांच की जा रही है। इसकी पुष्टि की जाएगी कि ये वाकई नक्सलियों ने ही लगाए हैं या नहीं।”










