उत्तर प्रदेशबस्ती

विद्युत विभाग की मनमानी: दुबौलिया के अवर अभियंता के खिलाफ शिकायत, अवैध वसूली का आरोप

दुबौलिया फीडर में 'भ्रष्टाचार का खेल': एक ही गाटा संख्या पर कई कनेक्शन, मची खलबली; बस्ती: क्या 'अजेय' हैं दुबौलिया के अवर अभियंता? भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कार्यशैली

बस्ती: दुबौलिया फीडर बना भ्रष्टाचार का अड्डा? अवर अभियंता की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

बस्ती। जनपद के दुबौलिया विकास खंड में तैनात विद्युत विभाग के अवर अभियंता की कार्यप्रणाली अब सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है। विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर स्थानीय अधिवक्ता चिन्ताहरन सिंह ने अधीक्षण अभियंता को शिकायती पत्र सौंपकर हड़कंप मचा दिया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि सरकारी तंत्र के भीतर पनप रहे भ्रष्टाचार की पोल भी खोलता है।

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क्या है पूरा मामला?

​अधिवक्ता द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, दुबौलिया फीडर भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। आरोप है कि अवर अभियंता ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर एक ही गाटा संख्या और चक नंबर पर धड़ल्ले से कई विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर और किन परिस्थितियों में विभागीय नियमों को दरकिनार किया गया? क्या यह विभागीय मिलीभगत है या फिर महज एक बड़ी लापरवाही?

अवैध वसूली और ‘अजेय’ होने का दावा

​शिकायत में सबसे गंभीर आरोप अवैध धन उगाही का है। अधिवक्ता का दावा है कि अवर अभियंता न केवल मनमाने तरीके से कनेक्शन बांट रहे हैं, बल्कि इसके बदले किसानों से मोटी रकम वसूली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारी का रसूख इतना है कि वे क्षेत्र में खुलेआम दावा करते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। क्या यह विभागीय संरक्षण का प्रमाण नहीं है?

राजस्व को लग रहा चूना, नियम हो रहे ध्वस्त

​क्षेत्र में नियमों के विपरीत जाकर मोटरों का संचालन कराया जा रहा है, जिससे विभाग को भारी राजस्व की हानि हो रही है। यदि एक ही स्थान पर कई कनेक्शन दिए जा रहे हैं, तो निश्चित रूप से यह विभाग की नीतियों और सरकारी धन की लूट का स्पष्ट मामला है।

जांच पर टिकी नजरें

​अधिवक्ता चिन्ताहरन सिंह ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या अधीक्षण अभियंता इस मामले में वाकई निष्पक्ष जांच करवाते हैं, या फिर यह शिकायत भी फाइलों के बोझ तले दबकर दम तोड़ देगी?

​दुबौलिया फीडर की यह कार्यप्रणाली न केवल विद्युत विभाग की साख पर बट्टा लगा रही है, बल्कि ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ भी अन्याय है। यदि आरोपों में सच्चाई है, तो संबंधित अधिकारी पर कठोरतम विभागीय कार्रवाई अनिवार्य है, ताकि आम जनता का व्यवस्था पर से भरोसा न उठे।

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