
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिला निजी शिक्षण संस्थान द्वारा सरकार की गैर-सरकारी स्कूलों के प्रति कथित दमनकारी नीतियों और प्रताड़ना के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक बंद का आह्वान किया गया है। इस आंदोलन के तहत कल भीलवाड़ा जिले के सभी निजी शिक्षण संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे।
संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, राज्य में गैर-सरकारी विद्यालयों का सामाजिक और शैक्षिक योगदान उल्लेखनीय होने के बावजूद, पिछले कुछ समय से विभाग और सरकार द्वारा भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाई जा रही हैं। आरटीई (RTE) के तहत मिलने वाले भुगतान को नियमों और अनौपचारिक पाबंदियों के नाम पर रोका जा रहा है, जिससे स्कूलों का वित्तीय संचालन पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन कल
इस नीति के विरोध में कल जिले भर के स्कूल संचालक दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने ‘मूर्ख जी उद्यान’ में एकत्रित होंगे। वहां सभी संचालक अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
आंदोलन की प्रमुख मांगें:
शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था की समाप्ति: शिक्षा संबलन के नाम पर की जा रही निरीक्षण व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए।
टीसी की अनिवार्यता: बिना ‘नो-ड्यूज सर्टिफिकेट’ के अन्य स्कूलों द्वारा सीधे टीसी जारी करने की बाध्यता को हटाया जाए।
आरटीई प्री-प्राइमरी भुगतान: आरटीई के अंतर्गत प्री-प्राइमरी कक्षाओं (PP3+, PP4+, PP5+) का बकाया भुगतान तुरंत शुरू किया जाए।
अवैधानिक प्रतिबंध हटाना: किसी एक कक्षा में नॉन-आरटीई छात्र न होने पर पूरे स्कूल का भुगतान रोकने के नियम को तुरंत बदला जाए।
कोविड काल का भुगतान: सत्र 2020 और 2021 (कोविड काल) में ऑफलाइन शिक्षण कार्य कराने वाले स्कूलों का बिना किसी शर्त के आरटीई भुगतान जारी किया जाए।
मानक संचालन और प्रताड़ना पर रोक: दोहरे नामांकन और बार-बार जांच के नाम पर निजी स्कूल संचालकों को मानसिक व प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित करना बंद किया जाए।
बजट में 10% की वृद्धि: आरटीई के अंतर्गत यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि का स्टैंडिंग ऑर्डर तुरंत जारी हो।
पुस्तकों की राशि का सीधे भुगतान: आरटीई छात्रों की पाठ्यपुस्तकों की राशि (रु. 1000 से रु. 2000 प्रति विद्यार्थी) सीधे अभिभावकों या स्कूल प्रबंधन के खातों में भेजी जाए।
चेतावनी: मांगें न मानने पर राज्यव्यापी आंदोलन
भीलवाड़ा जिला निजी शिक्षण संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 10 दिनों में इन सभी जायज मांगों का बिना किसी शर्त के निस्तारण नहीं किया गया, तो राजस्थान के सभी गैर-सरकारी विद्यालय एक बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी।
यह विज्ञप्ति संस्थान के जिला अध्यक्ष अर्जुन देवनाथ, जिला महासचिव राम गोपाल शर्मा और ग्रामीण जिला अध्यक्ष देवीलाल साहू द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई है।













