
बस्ती में सफाई का ढोंग: नालियों से निकला कचरा वापस नालियों में ही लौट रहा!
नगर पालिका का 'सफाई अभियान' बना मजाक, सड़क पर पड़ा कचरा फिर बन रहा मुसीबत। दिखावे की सफाई, बदहाल बस्ती: नालियों का कचरा सड़क पर, प्रशासन मूकदर्शक!
अजीत मिश्रा (खोजी)
नगर पालिका का ‘दिखावा’ या लापरवाही? नालियों से निकला कचरा फिर बन रहा मुसीबत
- ‘सफाई’ के नाम पर कचरे की रस्म-अदायगी: नाली साफ हुई पर जलभराव वही!
- बस्ती नगर पालिका की कारगुजारी: कचरे का सिर्फ स्थान परिवर्तन, समाधान नदारद।
- फोटोशूट वाला ‘सफाई अभियान’: नालियां साफ कम, कचरा वापस भरने की रफ्तार ज्यादा!
- स्थायी समाधान चाहिए, दिखावा नहीं: बस्ती की जनता ने नगर पालिका को घेरा।
- नगर पालिका का ‘विशेष अभियान’ फेल, मानसून की पहली बारिश में ही सड़कों पर कचरे का अंबार।
बस्ती: नगर पालिका परिषद बस्ती द्वारा शहर में चलाए जा रहे ‘विशेष सफाई अभियान’ की पोल खुद शहर की नालियां खोल रही हैं। सफाई का यह अभियान कागजों पर तो सफल दिख रहा है, लेकिन धरातल पर यह केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है।
सफाई का नाटक, फिर वही सड़ांध
नगर अध्यक्ष नेहा वर्मा के निर्देशन और अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकुर वर्मा की मौजूदगी में नालियों की सफाई तो हो रही है, लेकिन व्यवस्था की विडंबना देखिए—नालियों से गाद और कचरा निकाला जरूर जाता है, पर उसे सड़क किनारे ही छोड़ दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि कुछ ही घंटों में तेज रफ्तार वाहनों के थपेड़े या हल्की बारिश की बौछारें उस कचरे को वापस उसी नाली के पेट में धकेल देती हैं।
जनता का सवाल: क्या यह सफाई है या कचरे का स्थानांतरण?
स्थानीय निवासियों का आक्रोश साफ है। उनका कहना है कि यह सफाई कम और ‘कचरे का स्थान परिवर्तन’ ज्यादा लग रहा है। एक स्थानीय नागरिक ने तंज कसते हुए कहा, “सफाई कर्मचारी नाली साफ करके चले जाते हैं, और नाला दोबारा भरने का काम कुदरत (बारिश) कर देती है।”
इस लचर व्यवस्था का खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क का अस्तित्व जलभराव के बीच खो जाता है। गंदगी से उठती बदबू और मच्छरों का प्रकोप अलग से आमजन का जीना मुहाल कर रहा है।
जिम्मेदारी कब तय होगी?
सवाल यह है कि क्या नगर पालिका के पास केवल नालियां साफ करने का बजट है, कचरा ढोने (उठान) का नहीं? यदि निकाला गया कचरा घंटों-दिनों तक सड़क पर पड़ा रहेगा, तो इस अभियान का औचित्य ही क्या है?
जनता की दो टूक मांग:
- तत्काल उठान: नालियों से निकले कचरे को उसी समय उठाकर डंपिंग साइट तक पहुंचाया जाए।
- स्थायी समाधान: दिखावे का अभियान बंद कर, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाए।
नगर पालिका प्रशासन को यह समझना होगा कि शहर की सूरत बदलने के लिए केवल फोटो सेशन और सतही कार्य काफी नहीं हैं। अगर कचरे का निस्तारण समय पर नहीं हुआ, तो यह ‘सफाई अभियान’ केवल सरकारी धन की बर्बादी और जनता की आंखों में धूल झोंकने के सिवा कुछ नहीं कहलाएगा।
क्या बस्ती नगर पालिका इस अव्यवस्था पर संज्ञान लेगी, या शहर की नालियां इसी तरह कचरा वापस उगलती रहेंगी?















