उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती की बदहाली: बिजली के तारों के नीचे ‘मौत’, सड़कों पर ‘नरक’! जिम्मेदार सोए, बस्ती रोए: प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!

नगर पालिका बनाम बिजली विभाग: दोनों विभागों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती की दुर्दशा: जिम्मेदार सो रहे, शहर बदहाल

  • ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना, बदबू और कीचड़ अपना!
  • नगर पालिका और बिजली विभाग का ‘तू-तू, मैं-मैं’; आम जनता परेशान!
  • बरसात में बस्ती: सड़कों पर नदियां और आसमान में तारों का मौत का जाल!

बस्ती: क्या हमारा शहर अब केवल नारों और कागजी विकास की भेंट चढ़ चुका है? आज बस्ती शहर की सड़कों पर निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है। शहर के ऊपर आसमान को ढके हुए बिजली के तारों का खतरनाक ‘मकड़जाल’ मौत बनकर लटका है, तो नीचे कीचड़, गंदगी और जलभराव ने आम जनजीवन को नरक बना दिया है।

आरोप-प्रत्यारोप का खेल, जनता बेहाल

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि नगर पालिका और बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में व्यस्त हैं। तारों के जाल को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी किसकी है? जलभराव के लिए नाले की सफाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब देने के बजाय दोनों विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। क्या जनता इसी दिन के लिए टैक्स देती है कि वह गंदगी में जीने को मजबूर हो और लटकते तारों के नीचे अपनी जान जोखिम में डाले?

बरसात में खुली पोल

पहली ही बारिश ने विकास के दावों की कलई खोलकर रख दी है। जगह-जगह जलभराव और कीचड़ का साम्राज्य है। नालियां चोक हैं और सड़कों पर बहता गंदा पानी संक्रामक बीमारियों को न्योता दे रहा है। जैसे ही बारिश शुरू होती है, शहर में अव्यवस्था ‘बरसाती मेंढकों’ की तरह हर तरफ उछलने लगती है। बदबू के मारे घरों में बैठना दूभर है और सड़कों पर पैदल चलना दुस्साहस जैसा लगता है।

  • बिजली के तारों का जानलेवा जाल: शहर की गलियों और सड़कों के ऊपर लटके बिजली के तारों का जाल बेहद खतरनाक स्थिति में है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है।
  • नगर पालिका बनाम बिजली विभाग: दोनों विभागों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
  • बरसात में बदतर हालात: बारिश शुरू होते ही शहर की सफाई व्यवस्था और जल निकासी प्रणाली की पोल खुल गई है; जगह-जगह जलभराव, कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है।
  • प्रशासन की उदासीनता: नगर प्रशासन की ओर से इस समस्या के प्रति गहरी चुप्पी और लापरवाही बरती जा रही है, जो आम जनता के लिए चिंता और आक्रोश का विषय है।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा का संकट: जलभराव और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, साथ ही असुरक्षित तारों के नीचे से गुजरना लोगों के लिए जोखिम भरा हो गया है।

प्रशासन की चुप्पी, आखिर कब तक?

ऐसा लगता है मानो बस्ती प्रशासन गहरी कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। क्या किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतज़ार किया जा रहा है? तारों का यह जाल कल किसी की जान ले सकता है, और यह जलभराव शहर की स्वच्छता पर बड़ा बदनुमा दाग है।

​जनता अब स्पष्टीकरण नहीं, समाधान चाहती है। जिम्मेदार अधिकारी यह जान लें कि जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। यदि तत्काल प्रभाव से इन तारों को व्यवस्थित नहीं किया गया और सफाई-जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था नहीं हुई, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।

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