उत्तर प्रदेशबस्ती

फट्टी के सहारे विकास! जिला पंचायत कार्यालय के उद्घाटन में दिखी घोर लापरवाही

अधूरे काम का 'अधूरा' उद्घाटन: शिलापट्ट टिकाने के लिए लेनी पड़ी लकड़ी की मदद: बस्ती: उद्घाटन की 'जल्दबाजी' या 'दिखावा'? फट्टी पर टिका शिलापट्ट बना चर्चा का विषय

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अजीत मिश्रा (खोजी)

जल्दबाजी में उद्घाटन: फट्टी के सहारे टिका शिलापट्ट, सवालों के घेरे में जिला पंचायत प्रशासन

  • उद्घाटन की इतनी जल्दी क्यों? जिला पंचायत कार्यालय के शिलापट्ट की बदहाली पर उठे सवाल
  • क्या मुहूर्त के लिए अधूरे काम का लोकार्पण जरूरी था? उद्घाटन की तस्वीर ने खड़ी की नई बहस

बस्ती। जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों और उनके उद्घाटन की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार को लेकर सुर्खियों में रहे जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है नव निर्मित जिला पंचायत कार्यालय का उद्घाटन, जहाँ प्रशासनिक लापरवाही और जल्दबाजी की तस्वीरें सामने आई हैं।

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​फट्टी के सहारे खड़ा रहा शिलापट्ट

​उद्घाटन समारोह के दौरान जो दृश्य देखने को मिला, उसने मौके पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। कार्यालय के जिस शिलापट्ट का अनावरण किया जाना था, वह पूरी तरह से स्थापित ही नहीं था। निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण शिलापट्ट अपनी जगह पर टिक नहीं पा रहा था, जिसके चलते उसे लकड़ी की फट्टियों के सहारे खड़ा किया गया था। आनन-फानन में इसी स्थिति में उसका अनावरण कर दिया गया।

​व्यवस्था पर उठे सवाल

​इस घटना के बाद कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक भवन का उद्घाटन एक गरिमामयी कार्य होता है, जिसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण होनी चाहिए। यदि शिलापट्ट स्थापित करने का कार्य पूरा नहीं था, तो उद्घाटन कार्यक्रम को टालना ही बेहतर होता।

​आमजन में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? क्या किसी विशेष दबाव या मुहूर्त के चलते अधूरे काम का लोकार्पण करना आवश्यक था? लोगों का कहना है कि यह न केवल कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह जिला पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

​प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा कौतूहल

​गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से जिला पंचायत से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्य और लिए गए निर्णय विवादों के केंद्र में रहे हैं। बावजूद इसके, इस नई घटना ने लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा कर दी हैं। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर जिला पंचायत अध्यक्ष अथवा जिला पंचायत प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

​अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस लापरवाही के लिए कोई स्पष्टीकरण देता है या फिर इसे महज एक तकनीकी चूक मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में यह चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।

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