
सीएम के दौरे में व्यस्त प्रशासन, वन विभाग की शह पर रातों-रात कट गए आधा दर्जन शीशम
बस्ती में सीएम के आगमन का फायदा: लकड़ी माफिया ने वन विभाग की नाक के नीचे किया ‘ऑपरेशन सफाया’। क्या वन विभाग की मिलीभगत से कट रहे बस्ती के पेड़? सीएम के दौरे की आड़ में माफिया का तांडव
अजीत मिश्रा (खोजी)
प्रशासनिक व्यस्तता का फायदा: योगी के दौरे के बीच ‘लकड़ी माफिया’ ने वन विभाग की नाक के नीचे काटे शीशम के पेड़
- ‘खाकी-खादी’ व्यस्त, माफिया मस्त: तेनुई चेत सिंह में शीशम की कटान से वन विभाग बेनकाब
- बस्ती में कानून का ‘लकड़ी माफिया’ राज: सीएम के दौरे की व्यस्तता का उठाया नाजायज फायदा
- वन विभाग की नाक के नीचे ‘हरा सोना’ हुआ गायब, वायरल वीडियो ने खोली माफिया-विभाग के गठजोड़ की पोल
बस्ती: प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के बस्ती आगमन को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला सुरक्षा और व्यवस्थाओं की चाक-चौबंद तैयारियों में जुटा था। आला अधिकारियों से लेकर स्थानीय कर्मचारी तक वीआईपी कार्यक्रम की व्यस्तता में मशगूल थे, लेकिन इस व्यस्तता का ‘लकड़ी माफिया’ ने न केवल फायदा उठाया, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात के अंधेरे में ‘ऑपरेशन सफाया’
मामला विकासखंड गौर के अंतर्गत ग्राम पंचायत ‘तेनुई चेत सिंह’ का है। यहाँ वन विभाग (राम नगर रेंज) की कथित मिलीभगत और शह के चलते लकड़ी माफिया ने रातों-रात आधा दर्जन शीशम के हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी परमिट के इतनी बड़ी कटान को अंजाम दिया गया। माफिया इतने बेखौफ थे कि उन्होंने कटी हुई लकड़ी का एक हिस्सा मौके पर ही छोड़ दिया और बाकी को अपने ठिकाने तक पहुँचाने में भी सफल रहे।
सवालिया निशान: विभाग की ‘मौन स्वीकृति’ या नाकामी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर हाई अलर्ट होता है, तब आखिर माफिया को पेड़ों की कटाई और उन्हें ढोने का दुस्साहस कैसे हुआ? क्या यह बिना विभागीय मिलीभगत के संभव है? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजरें इनायत न होतीं, तो दिन-दहाड़े या रात के अंधेरे में इतनी बड़ी अवैध कटान संभव नहीं थी।
रेंजर का आश्वासन, क्या कार्रवाई होगी ठोस?
मामला संज्ञान में आने के बाद राम नगर की रेंजर सोनल वर्मा ने जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग की टीम अब जांच-पड़ताल की बात कह रही है। लेकिन, बस्ती के जागरूक नागरिक अब यह पूछ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या फिर इन माफियाओं के खिलाफ कोई मिसाल कायम की जाएगी?
कड़ी कार्रवाई की दरकार
लगातार होती ऐसी घटनाओं से लकड़ी माफिया के हौसले बुलंद हैं। अगर समय रहते माफियाओं के नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो बस्ती के वन संपदा को नुकसान पहुँचाने का यह सिलसिला थमेगा नहीं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार कानून का डंडा चलेगा, या रसूखदार माफिया फिर से कानून को ठेंगा दिखाने में कामयाब हो जाएंगे?

















