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भागवत कथा में सुनाया श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग, गूंजे बधाई गीत

रीठी, कटनी।। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP.IMG 20251111 WA0014 IMG 20251111 WA0015 1

रीठी जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरजी में पाठक परिवार के निवास में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को कथा व्यास पंडित सनत कुमार जी महाराज द्वारा छटवे दिवस की कथा श्रवण कराई गई। जिसमे भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की लीलाओं का मनमोहक वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। कथाव्यास ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया। इस अवसर पर विपिन तिवारी, गणेश उपाध्याय, बिंजन श्रीवास, हरिप्रसाद पाठक, अनिल पाठक, मनोहर, सोनुकुमार पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति रही।

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